सावधान... भारी पड़ सकता है रेट्रो लुक वाला '80 AI पोट्रेट' ट्रेंड, साइबर ठगों के निशाने पर आपका बायोमेट्रिक डेटा
इंटरनेट मीडिया पर '80 के दशक के एआई पोट्रेट' का ट्रेंड साइबर सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। विशेषज्ञ ...और पढ़ें

:तस्वीर एआई से तैयार की गई है।
HighLights
एआई पोट्रेट ट्रेंड से साइबर सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
अज्ञात एप्स बायोमेट्रिक डेटा और निजी जानकारी चुरा रहे हैं।
डीपफेक, ब्लैकमेलिंग और फर्जी बैंक खातों का अंदेशा है।
अमित मिश्रा, ग्वालियर। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर '1980 से 89 के बीच के दशक का एआई पोट्रेट' और 'रेट्रो लुक' का खुमार छाया हुआ है। न सिर्फ सामान्य लोग बल्कि सांसद, विधायक, मंत्री, यहां तक कि कुछ अफसर- हर कोई अपनी तस्वीरों को एआई एप के जरिए क्लासिक अंदाज में बदलकर अपलोड कर रहे हैं।
लेकिन, खूबसूरत और ट्रेंडिंग दिखने की यह होड़ किसी की भी साइबर सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकती है। साइबर विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस ट्रेंड की आड़ में साइबर अपराधी लोगों की बायोमेट्रिक पहचान, फोटो, शारीरिक डील-डौल और दूसरे निजी डाटा में सेंध लगा रहे हैं।
इसका उपयोग वह न सिर्फ ठगी बल्कि बदनाम करने, इसके जरिये अश्लील फोटो-वीडियो बनाने तक में कर सकते हैं। लोग इस खतरे से अंजान हैं और सिर्फ इंटरनेट मीडिया पर चल रहे ट्रेंड का हिस्सा बनने की होड़ में अपनी सारी जानकारी इन ऐसे एप को सौंप रहे हैं।
तस्वीर अपलोड करते ही निजता को खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई फोटो जनरेट करने वाले कई अज्ञात एप्स और वेब लिंक्स प्रोसेसिंग के नाम पर यूजर्स से उनकी हाई-क्वालिटी फोटो मांगते हैं। फोटो अपलोड करते ही जाने-अन्जाने में यूजर अपनी बायोमेट्रिक पहचान और संवेदनशील डाटा विदेशी या असुरक्षित सर्वर पर साझा कर बैठते हैं।
इन चार बड़े खतरों का है अंदेशा
बायोमेट्रिक डाटा की चोरी
हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों से चेहरे की बनावट (फेशियल रिकग्निशन) का डाटा चुरा लिया जाता है, जिसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा सकता है।
डीपफेक से ब्लैकमेलिंग
अपराधी इन तस्वीरों का इस्तेमाल एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो बनाने में कर सकते हैं, बाद में यह ब्लैकमेलिंग करते हैं। ऐसे मामले पूर्व में भी आए हैं, जब मोबाइल में सेंध लगाकर गैलरी से फोटो चुराई गईं और डीपफेक के जरिये इनका गलत इस्तेमाल किया गया।
फोन पर नियंत्रण
एआई एप्स फोटो प्रोसेस करने के बहाने फोन की गैलरी, कांटेक्ट लिस्ट, जीपीएस, टैक्स्ट मैसेज तक की अनुमति मांग लेते हैं।
फर्जी बैंक खाते
बायोमेट्रिक स्कैन और फोटो के जरिए जालसाज फर्जी पहचान पत्र तैयार कर साइबर ठगी और फर्जी बैंक खाते खोलने जैसे अपराधों को अंजाम दे सकते हैं। बायोमैट्रिक पेमेंट के जरिये आधार से खाते में सेंध लगा सकते हैं।
अन्जान एआई एप्स को कभी भी अपने फोन की अनुमति न दें। किसी भी थर्ड-पार्टी लिंक या एप पर अपनी असली तस्वीरें अपलोड करने से बचें। यदि एप आपकी कांटेक्ट लिस्ट या लोकेशन मांगता है, तो उसे तुरंत अनइन्स्टाल करें। यह 1980 से 89 के बीच के दशक का लुक पाने की होड़ में लोग अपना निजी डाटा दूसरों को सौंप रहे हैं। इसका वह कितना खतरनाक इस्तेमाल कर सकता है, सोच भी नहीं सकते, इसलिए सावधान होने की जरूरत है।
- डॉ. कुलभूषण सिंह, साइबर विशेषज्ञ एवं एडवोकेट (साइबर लॉ), उच्च न्यायालय, ग्वालियर
