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प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सेठ से लिया कर्ज लौटाने से ब्रिटेन का इनकार, सीहोर के रुठिया परिवार के दावे पर कहा- 'रिकॉर्ड नहीं'

Published: Sun, 18 Oct 2026 10:32 PM (IST)

ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सीहोर के सेठ रुठिया परिवार से लिए 35 हजार रुपये के कर्ज ...और पढ़ें

कर्ज का ऐतिहासिक दस्तावेज व सीहोर के रुठिया परिवार के सदस्य।

कर्ज का ऐतिहासिक दस्तावेज व सीहोर के रुठिया परिवार के सदस्य।

HighLights

  1. सीहोर के सेठ जुम्मा लाल ने 1917 में दिया था 35 हजार रुपये का कर्ज।

  2. सेठ जुम्मा लाल के उत्तराधिकारियों ने ब्रिटश सरकार को भेजा था नोटिस।

  3. ब्रिटिश सरकार ने ईमेल भेजकर कहा - इस कर्ज का उनके पास कोई रिकार्ड नहीं।

डिजिटल डेस्क, सीहोर। ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के समय लिए 35 हजार रुपये के कर्ज की देनदारी से इनकार कर दिया है। यह कर्ज सीहोर के प्रसिद्ध सेठ रुठिया के परिवार के सदस्य ने दिया था। रुठिया परिवार ने पिछले दिनों नोटिस भेजा था। अब ब्रिटेन (यूके) के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर कहा है कि उनके पास इस कर्ज का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। 

दरअसल सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने दावा किया है कि उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल रुठिया ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। यह रकम ब्रिटिश सरकार ने कभी वापस नहीं की। इसकी वसूली के लिए कारोबारी विनय रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांश रानीवाला के जरिए यूके (ब्रिटेन) सरकार को कानूनी नोटिस भेजा। 

दस्तावेज भेजने के बाद भी नहीं मिला भुगतान का भरोसा

तीन अगस्त को ब्रिटेन के ऋण प्रबंधन कार्यालय ने ईमेल भेजकर रुठिया परिवार से इस कर्ज से संबंधित दस्तावेज, शर्तें व आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद विनय रुठिया ने ब्रिटिश सरकार के पोलिटिकल एजेंट के हस्ताक्षरयुक्त लिखित दस्तावेज और प्रमाणित रिकॉर्ड भेजे थे। 

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ब्रिटिश सरकार ने देनदारी से झाड़ा पल्ला

यूके ऋण प्रबंधन कार्यालय के संचार विभाग ने 16 अक्टूबर को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है। इसमें कहा गया कि दावे की गहन जांच की गई, लेकिन उनके विभाग में इस कथित कर्ज का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रमाण मौजूद नहीं है। इस आधार पर यूके सरकार ने भुगतान की किसी भी कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। 

विनय रुठिया इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यूके सरकार को इस ऐतिहासिक ऋण से संबंधित मामलों में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।