3 हजार भीलों के साथ अंग्रेजों से लड़े थे आदिवासी नायक सीताराम कंवर, 168 साल पुराने दुर्लभ दस्तावेज ने खोली बलिदान की कहानी
मध्य प्रदेश के अभिलेखागार में 168 साल पुराने दस्तावेज से आदिवासी नायक सीताराम कंवर के बलिदान की कहानी सामने आई ...और पढ़ें

होलकर रियासत की ऐतिहासिक विज्ञप्ति, जिसमें सीताराम कंवर को पकड़ने के लिए 200 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। (सौजन्य- पुरातत्व विभाग)
HighLights
स्मारक में नाम लिखाने के लिए समाजजन को जुटाना पड़ा प्रमाण।
होलकर रियासत के 1858 की विज्ञप्ति में सामने आई वीरता की कहानी।
सीताराम कंवर की गिरफ्तारी पर 200 रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। स्वतंत्रता संग्राम के कई ऐसे नायक हैं, जिनकी भूमिका समय के साथ विस्मृत हो गई। ऐसे ही एक क्रांतिकारी सीताराम कंवर की कहानी मध्य प्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय में संरक्षित विज्ञप्ति से सामने आई है। वर्ष 1858 में होलकर रियासत से जारी विज्ञप्ति में सीताराम को पकड़ने के लिए 200 रुपये का इनाम घोषित था।
अंग्रेजी शासन के फरमान के आधार पर होलकर दरबार ने विज्ञप्ति जारी की थी। इसमें लिखा है, ''सीताराम कंवर ने सच्चाई का रास्ता छोड़ सरकार पर नजर नफरत की डाली और रास्ता बुराई का चुना है। भीमा नायक और ख्वाजा नायक के साथ शामिल हो गया है। वीरमन गांव और ताठाबरूड़ में भीलों को साथ लेकर आया और अपनी जात के आदमियों को बहकने बहकने लगा, इसलिए गिरफ्तारी की व्यवस्था करना जरूरी है।''
अंग्रेजी हुकूमत को दी थी चुनौती
कंवर जनजाति के सीतराम ने लगभग तीन हजार लोगों के साथ उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध निमाड़ अंचल में मोर्चा खोल दिया था। होलकर दरबार के सिपाहियों को भी क्रांति के लिए प्रेरित किया था। नौ अक्टूबर 1858 में अंग्रेजों की विरुद्ध लड़ते हुए वे बलिदान हुए।
ऐसे मिला प्रमाण
यह विज्ञप्ति तब सामने आई है, जब अखिल भारतीय कंवर आदिवासी विकास समिति शहडोल के सदस्य अशोक कंवर ने बड़वानी शहर के करंजा चौक में स्मारक में अंकित बलिदानियों के नाम में उनका नाम लिखने की मांग जुलाई 2025 में कलेक्टर से की। इसके लिए जिला प्रशासन ने प्रमाण मांगे तो उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र लिखा। वहां से मध्य प्रदेश शासन के संस्कृत विभाग को पत्र आया। अभिलेखागार में अभिलेख खोजे गए तो यह विज्ञप्ति मिली।
मराठी/मोड़ी लिपि में दर्ज है विज्ञप्ति
मराठी भाषा और मोड़ी लिपि में जारी इस विज्ञप्ति को पुरातत्व संचालनालय के भाषा विशेषज्ञ सैयद नईमुद्दीन ने हिंदी में अनुवादित किया। अशोक कंवर ने बताया कि अभिलेखागार के पुरालेख अधिकारी पदम सिंह मीणा द्वारा सत्यापित प्रति उन्हें प्राप्त हुई है।
अभिलेखागार में संरक्षित होलकर रियासतकालीन अभिलेखों में उपलब्ध सीताराम कंवर से संबंधित हस्तलिखित मोड़ी/मराठी लिपि के अभिलेखों में उल्लेखित विवरण के अनुसार जानकारी दी गई है।
-डॉ. मनीषा शर्मा, संयुक्त संचालक, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।