सीहोर में शिवराज के हस्तक्षेप के बाद वन विभाग ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकी; धरने पर बैठे प्रभावित आदिवासी परिवार
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप के बाद सीहोर के कोसमी गांव में वन विभाग ने अतिक्रमण हटाओ अभियान ...और पढ़ें

प्रभावित आदिवासियों को ढाढस बंधाते केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
HighLights
शिवराज चौहान के हस्तक्षेप से अतिक्रमण रोधी अभियान रुका।
प्रभावित आदिवासी परिवार कोसमी डिपो पर धरने पर बैठे।
न्याय न मिलने पर भोपाल में प्रदर्शन की चेतावनी दी।
डिजिटल डेस्क, सीहोर। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप के बाद वन विभाग ने उनके संसदीय क्षेत्र के कोसमी गांव में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को फिलहाल रोक दिया है। रविवार को पौधारोपण के लिए जमीन खाली कराने के क्रम में वन विभाग ने आदिवासी परिवारों का कब्जा हटाया था। झोपड़ियों में तोड़फोड़ की गई थी, इस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज नाराज हुए थे। प्रभावित आदिवासी परिवार कोसमी डीपो के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि बुधवार तक उनको न्याय नहीं मिला तो गुरुवार से वे भोपाल में धरना शुरू करेंगे।
हटने को तैयार नहीं प्रभावित परिवार
घरों से बेदखल होने के बाद प्रभावित परिवार वहां से हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी गृहस्थी का पूरा सामान टूटी हुई झोपड़ियों के पास ही पड़ा है। परिवार के अधिकांश सदस्य कोसमी डीपो पर धरने के लिए बने पांडाल में बैठे हैं। वहीं पर उनका भोजन भी बन रहा है। वहीं कुछ लोग टूटी हुई झोपड़ियों के पास लौट आए हैं। वे उसे ठीक करने की कोशिश भी कर रहे हैं।
खुले आसमान तले बितानी पड़ी रात
पीड़ित आदिवासियों का कहना है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात आसमान तले बितानी पड़ी। वन विकास निगम ने लंबे समय से चल रही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के तहत रविवार को कोसमी में कार्रवाई की थी। इस दौरान वन अमले ने दोपहर तक नौ झोपड़ियों को खाली कराकर तोड़ दिया। आधी से अधिक फसल पर ट्रैक्टर चलाकर रौंद दिया गया था। एक कुएं को मिट्टी डालकर पाट दिया गया।

12 हेक्टेयर जमीन से हटाया अतिक्रमण
इस कार्रवाई में करीब 12 हेक्टेयर जमीन का अतिक्रमण खाली कराया गया। कार्रवाई से भड़के परिवार धरने पर बैठ गए। रविवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान उनसे मिलने पहुंचे और उन्होंने मुख्य सचिव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से बात कर नाराजगी जताई।
धरने पर पहुंचे कार्तिकेय
शिवराज के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय नेताओं का कोसमी जाने का सिलसिला जारी है। सोमवार शाम शिवराज के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। बताया जा रहा है कि दिल्ली के प्रदर्शन से लौटने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी यहां पहुंचने वाले हैं।
यह भी पढ़ें- सीहोर में वन विभाग ने आदिवासियों का घर तोड़ा, फसलें रौंदी; केंद्रीय मंत्री शिवराज बोले- यह जुर्म की पराकाष्ठा
वन विकास निगम के डिवीजनल मैनेजर तरुण कौरव से सीधी बात
प्रश्न – इस तरह की कार्रवाई की नौबत क्यों आई?
उत्तर - वहां करीब 187 हेक्टेयर क्षेत्र में 2021 में प्लांटेशन किया गया था। उसमें से 32 हेक्टेयर जमीन पर इन 12 परिवारों ने 2022 में कब्जा कर लिया। वे अस्थायी झोपड़ियां बनाकर वहां खेती करने लगे। गूगल अर्थ की तस्वीरों में भी वर्ष 2021 में यह क्षेत्र वन क्षेत्र के रूप में दिखाई देता है। उससे पहले उनके काबिज होने का कोई प्रमाण नहीं है। वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए यह कार्रवाई हुई।
प्रश्न – यह काम विधिक प्रक्रिया के तहत हो सकता था?
उत्तर – अतिक्रमण की जानकारी सामने आने के बाद से उनको विधिक ढंग से हटाने की प्रक्रिया हुई। वर्ष 2025 में संबंधित परिवारों को दो-दो बार नोटिस जारी किए गए। अतिक्रमण स्वयं हटाने के लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया गया। पिछले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। पूरी कार्रवाई को नियमानुसार और वैधानिक है।
प्रश्न – कहा जा रहा है कि उन आदिवासी परिवारों के सिर से छत छिन गई?
उत्तर – तोड़ी गई झोपड़ियां बिल्कुल अस्थायी थीं। संबंधित परिवारों के ग्राम सिंहपुर में पक्के मकान हैं। उनके नाम वहां की मतदाता सूची में दर्ज हैं।
