उज्जैन में तीन लाख लीटर क्षमता का प्लांट लगाएगा सांची, ताकि सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के लिए कम न पड़े दूध; कुंभ क्षेत्र में खुलेंगे 300 बूथ
उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए दूध की संभावित भारी मांग को देखते हुए सांची ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ श्रद्धालुओं की उम्मीद।
सांची लगाएगा 3 लाख लीटर क्षमता का नया प्लांट।
उज्जैन में 300 से अधिक दूध बूथ खुलेंगे।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ के दौरान करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने के अनुमान के बीच दूध की मांग अचानक बढ़ने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान वहां दूध की मांग करीब तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। संभावित मांग को देखते हुए सांची तीन लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया ऑटोमेटेड डेयरी प्लांट तैयार करने में जुट गया है। इस प्लांट को मार्च 2028 तक शुरू कर दिया जाना प्रस्तावित है।
नया प्लांट किया जा रहा तैयार
अधिकारियों ने बताया कि पिछले सिंहस्थ के दौरान रोजाना 1.10 लाख लीटर दूध की जरूरत पड़ी थी। अब भीड़ की संभावना अधिक है, इसलिए क्षमता तैयार रखना जरूरी है। उज्जैन में प्लांट की मौजूदा क्षमता करीब 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन की है। नई जरूरत के लिए दूसरा प्लांट तैयार किया जा रहा है।
इसके पहले चरण में करीब 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि बाद में विस्तार के लिए करीब 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। इस तरह परियोजना की कुल लागत करीब 250 करोड़ रुपये होगी। नई डेयरी शुरू होने के बाद पुरानी डेयरी को तत्काल बंद नहीं किया जाएगा। दोनों व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से चलाकर अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी।
300 से ज्यादा बूथ बनेंगे
सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को दूध, दही और छाछ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 300 से 350 मोबाइल और अस्थायी बूथ लगाने की जरूरत बताई गई है। वर्तमान में उज्जैन में रोज करीब 2.15 लाख लीटर दूध का संकलन होता है, जबकि पैकेज्ड दूध की बिक्री करीब 50 हजार लीटर है।
एक आधुनिक डेयरी प्लांट के निर्माण से लेकर उत्पादन तक सामान्यतः करीब 18 महीने लगते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से उत्पादन शुरू होगा। समय पर फंड उपलब्ध होता रहा, तो परियोजना मार्च 2028 तक तैयार हो जाएगी।
- जयदेव, प्रबंध संचालक, एमपीसीडीएफ।
