भोपाल में मां राजराजेश्वरी के 'एक करोड़ अर्चन' के लिए जुटे हजारों श्रद्धालु; संत रावतपुरा सरकार के सानिध्य में हुआ महाअनुष्ठान
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में शरद पूर्णिमा पर आयोजित हुआ देश का सबसे बड़ा श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन महाअनुष्ठान। 22 प्रकार की विशेष पूजन सामग्री से हुआ पूजन।

भोपाल में संत रावतपुरा सरकार के सानिध्य में एक करोड़ अर्चन।
HighLights
40 हजार श्रद्धालुओं ने किए एक करोड़ अर्चन।
संत रावतपुरा सरकार के सानिध्य में भव्य आयोजन।
नेपाल, देवास जैसी जगहों से आई दुर्लभ पूजन सामग्री।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। वैदिक मंत्रों की गूंज, चंद्रमा की शीतल अमृतमयी रोशनी और देश-विदेश से मंगाई गई दुर्लभ पूजन सामग्री से राजधानी का लाल परेड ग्राउंड सोमवार की शाम एक अलौकिक आध्यात्मिक चेतना का साक्षी बना। संत रावतपुरा सरकार के मंगल सानिध्य में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भोपाल में पहली बार ‘श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन’ महाअनुष्ठान श्रद्धा और भव्यता के साथ निर्विघ्न आयोजित हुआ।
देश के इस सबसे बड़े अर्चन महाअनुष्ठान में मंत्री-विधायक समेत लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं ने बैठकर मां भगवती के चरणों में एक करोड़ अर्चन समर्पित किए। हालांकि आयोजकों ने करीब 60 हजार बैठकी की व्यवस्था की थी। सभी श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री निश्शुल्क उपलब्ध कराई गई।
शाम सात बजे प्रारंभ हुए इस विराट आयोजन का वातावरण उस समय शिवमय हो गया, जब पूज्य महाराजश्री के कार्यक्रम स्थल पर आगमन पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से आए 51 पंडितों ने शंख, डमरू, झालर और ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ उनकी अगवानी की। इस दौरान भव्य आतिशबाजी की गई और हजारों आकाशदीप प्रज्ज्वलित कर आकाश में छोड़े गए, जिससे पूरा परिसर जगमगा उठा।
1100 आचार्यों के सानिध्य में हुआ सहस्त्र नामावली पाठ
ब्रह्मांड पुराण के ललितोपाख्यान में वर्णित मां राजराजेश्वरी की सहस्त्र नामावली की ध्वनि से पूरा लाल परेड मैदान ऊर्जा के केंद्र में तब्दील हो गया। 1100 आचार्यों द्वारा उच्चारित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हर चौकी पर स्थापित कलश और दीपकों के समक्ष श्रद्धालुओं ने अर्चन किया। भगवान शिव द्वारा प्रदत्त इस ब्रह्मविद्या और श्रीविद्या अनुष्ठान को आत्मशक्ति व कुंडलिनी जागरण का अमोघ साधन माना गया है, जिसमें साधक लोक कल्याण का संकल्प लेकर स्वयंसिद्ध होता है।

नेपाल और देवास से आई दुर्लभ पूजन सामग्री
इस महापूजन के लिए देश के विभिन्न राज्यों सहित पड़ोसी देश नेपाल से 31 क्विंटल रुद्राक्ष एवं देवास से सौ क्विंटल विशेष हल्दी मंगाई गई थी। एक करोड़ अर्चन के लिए कुल 22 प्रकार की विशिष्ट सामग्रियों का उपयोग हुआ, जिनमें विभिन्न प्रकार के फल, मिष्ठान, औषधियां, मुद्राएं, धान्य और कुमकुम शामिल थे। अर्चन पूर्ण होने के उपरांत मां राजराजेश्वरी को विविध हरी सब्जियों, कच्चे एवं पक्के पारंपरिक पकवानों से युक्त विशेष ‘छप्पन भोग’ अर्पित किया गया।

चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बीच महाआरती से पूर्ण हुआ अनुष्ठान
मैदान के भीतर रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट के स्वयंसेवकों ने हजारों भक्तों के संकल्प को सुचारू रूप से पूर्ण कराया, वहीं बाहर प्रशासन ने यातायात व सुरक्षा व्यवस्था संभाली। रात मां की भव्य मंगल आरती के साथ इस ऐतिहासिक अनुष्ठान का समापन हुआ। पूज्य महाराजश्री के लोक कल्याण के संकल्प से साकार हुआ यह आयोजन राजा भोज की नगरी में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने की मंगल कामना
मंच पर विराजमान रावतपुरा सरकार के सानिध्य में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों सहित देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने एक साथ पूजन-अर्चन कर देश,समाज व परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
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अर्चन करने वाले विशिष्टजनों में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री प्रहलाद पटेल, गोविंद सिंह राजपूत, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, विष्णु खत्री, भगवान दास सबनानी, महापौर मालती राय, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी, मुकेश नायक और पीसी शर्मा शामिल रहे।
संत रावतपुरा सरकार के प्रति मेरी गहरी आस्था है। जब ज्ञात हुआ कि भोपाल में पहली बार इतने वृहद स्तर पर श्री राजराजेश्वरी अर्चन महाअनुष्ठान आयोजित हो रहा है, तो मैं परिवार के मंगल और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर पति व बच्चों के साथ शामिल हुई। इस पावन अनुष्ठान का हिस्सा बनकर धर्म के प्रति निष्ठा और सुदृढ़ हुई है तथा अद्भुत आध्यात्मिक शांति की अनुभूति हुई।
— रूही बरगले, भोपालमेरी मां ने संत रावतपुरा सरकार से दीक्षा ग्रहण की है। उन्हीं की प्रेरणा से मैं मां को लेकर इस महाअनुष्ठान में सम्मिलित होने पहुंचा था। यहां आकर मैंने भी माताजी के साथ पूर्ण श्रद्धाभाव से अर्चन किया। इस दिव्य वातावरण और सामूहिक साधना के प्रभाव से मन को गहरा संबल मिला है। इस पुण्य कर्म का शुभ फल अवश्य प्राप्त होगा।
— वीरेंद्र सोनी, भोपाल
