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शरद पूर्णिमा पर पन्ना धाम में भक्ति की धूम, आधी रात राज जी के पदार्पण के साथ शुरू हुआ रास, रातभर झूमे श्रद्धालु

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:25 PM (IST)

शरद पूर्णिमा महोत्सव पर पन्ना के श्री प्राणनाथ जी मंदिर में आधी रात को राज जी के पदार्पण के साथ ...और पढ़ें

भक्ति रस में सराबोर श्रद्धालु।

भक्ति रस में सराबोर श्रद्धालु।

HighLights

  1. पन्ना के श्री प्राणनाथ जी मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव।

  2. आधी रात राज जी के पदार्पण से रास लीलाएं शुरू हुईं।

  3. श्रद्धालुओं ने पूरी रात पारंपरिक रास-गरबा में भाग लिया।

डिजिटल डेस्क, पन्ना। शरद पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर पन्ना स्थित श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर का विशाल ब्रह्म चबूतरा आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठा। मध्यरात्रि में रासमंडल में राज जी के पदार्पण के साथ ही रास लीलाओं का शुभारंभ हुआ। इस दिव्य क्षण के साथ पूरा परिसर ढोल-मंजीरों की गूंज और श्रद्धालुओं के भक्तिभाव से गुंजायमान हो गया। देश-विदेश से आए सुंदरसाथ ने पारंपरिक रास-गरबा में भाग लेकर अपनी आराधना और समर्पण भाव प्रकट किया।

सुबह तक चला रास-गरबा 

महोत्सव में स्थानीय धामी समाज के साथ बड़ी संख्या में नगरवासी और देश-विदेश से आए श्रद्धालु शामिल हुए। सुंदरसाथ की टोलियां बनाकर पारंपरिक शैली में रास-गरबा करने का सिलसिला शुरू हुआ, जो पूरी रात से लेकर सुबह तक जारी रहा। ढोल-मंजीरों की ताल पर थिरकते श्रद्धालु अपने आराध्य राज जी के प्रति प्रेम और भक्ति में लीन नजर आए।

आयोजन में सोलह शृंगार से सजी महिलाएं और युवतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। उनकी पारंपरिक वेशभूषा और चेहरे पर झलकता भक्तिभाव उत्सव की छटा को और निखार रहा था। वहीं, पुरुष श्रद्धालु भी रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, साफा और अंगवस्त्र धारण कर रास की उमंग में शामिल हुए। ब्रह्म चबूतरे पर हर ओर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण दिखाई दिया।

यहां रास केवल नृत्य नहीं, आत्मा-परमात्मा के मिलन का प्रतीक

श्री प्राणनाथ जी की रास लीलाओं की विशेषता केवल नृत्य और उत्सव तक सीमित नहीं है। इस परंपरा में रास को आत्मा के परमात्मा से मिलन और आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। श्रद्धालुओं के लिए हर कदम, हर ताल और हर भाव भक्ति की अभिव्यक्ति बना रहा।

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शरद पूर्णिमा पर ब्रह्म चबूतरे में साकार हुआ यह दृश्य पन्ना धाम की विशिष्ट आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बना। रास लीलाओं में शामिल श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक अनुभूति को अपने लिए सौभाग्यपूर्ण बताया।