'भारत को जो अपना माने, वह भारतीय', मोहन भागवत ने स्पष्ट किया संघ का दृष्टिकोण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जबलपुर में आयोजित युवा शिविर में मुस्लिम समुदाय के प्रति संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत।
HighLights
संघ भारत को अपना मानने वाले को भारतीय मानता है।
धर्म या प्रांत के आधार पर संघ भेदभाव नहीं करता।
भागवत ने राजनीतिक प्रश्नों के उत्तर देने से इनकार किया।
डिजिटल डेस्क, रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुस्लिम समुदाय के प्रति संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि जो भारत को अपना मानता है, उसकी प्रगति में सहभागी बनता है और देश की उन्नति से खुश होता है, संघ उसके साथ भारतीय के रूप में व्यवहार करता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि संघ धर्म और प्रांत के आधार पर भेदभाव को नहीं, देश के प्रति व्यक्ति के भाव और व्यवहार को महत्वपूर्ण मानता है।
डॉ. भागवत ने यह बात रविवार को जबलपुर के श्रीराम इंजीनियरिंग कालेज में आयोजित संघ के महाकोशल प्रांत के युवा शिविर के जिज्ञासा समाधान सत्र में किए गए प्रश्न के उत्तर में कही। इस दौरान युवाओं ने उनसे संघ की विचारधारा, सामाजिक विषयों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से जुड़े सवाल पूछे।
युवाओं की जिज्ञासाओं में जनसंख्या असंतुलन, राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विषय भी शामिल रहे। डॉ. भागवत ने इन सवालों के जवाब देकर संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। बौद्धिक सत्र में उन्होंने युवाओं को देश के लिए तन, मन और धन समर्पित करने की भावना के साथ कार्य करने का संदेश दिया।
राजनीतिक प्रश्नों का नहीं दिया जवाब
डॉ. भागवत ने युवाओं से संवाद में राजनीतिक विषयों पर प्रश्नों के उत्तर देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि संघ का इससे कोई वास्ता नहीं है। ऐसे प्रश्न राजनीतिक लोगों से पूछे जाने चाहिए। ऐसे कई प्रश्न किए जाने पर उन्होंने यह प्रश्न स्वयं भी उठाया कि विद्यार्थी राजनीतिक प्रश्न आखिर क्यों पूछ रहे हैं?
