MP में कचरा प्रबंधन में नाकाम नगरीय निकायों पर लग सकता है 10 लाख रुपये तक जुर्माना, अधिकारियों की एसीआर में दर्ज होगा 'दाग'
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने शहरों में कचरा प्रबंधन पर सख्त रुख अपनाया है, इसे नागरिकों के मौलिक अधिकार का ...और पढ़ें

कचरा प्रबंधन में नाकामी पर एनजीटी रुष्ट।

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। शहरों में हरित क्षेत्रों, जलाशयों के आसपास अवैध रूप से कचरा फेंकने और जलाने के साथ ही पुराने कचरे के निपटारे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इसे पर्यावरण संतुलन और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए स्पष्ट किया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है। राज्य सरकार और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया गया।
भोपाल नगर निगम को लगाई फटकार
एनजीटी ने भोपाल में आदमपुर खंती सहित अन्य स्थलों पर पड़े कचरे के निपटान को लेकर दायर एक याचिका की सुनवाई में यह बात कही। इसके लिए नगर निगम की कड़ी आलोचना करते हुए निर्देश दिए कि बिना देरी किए कचरे का निस्तारण किया जाए। आदेश में कहा गया है कि नियमों का पालन नहीं होने पर स्थानीय निकायों पर प्रति माह एक लाख से 10 लाख रुपए तक का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है। स्थानीय निकाय जुर्माना भरने में असमर्थ रहते हैं, तो यह राशि राज्य सरकार को देनी होगी। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) में प्रतिकूल प्रविष्टि करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे उनका प्रमोशन और करियर प्रभावित होगा।
एनजीटी ने यह भी कहा कि ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन में लगातार लापरवाही सामने आ रही है। वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा नगर निगम को भी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी।
नगर निगम में पर्यावरण सेल करें गठित
एनजीटी ने मध्य प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करते हुए क्षति की भरपाई कराई जाए और पर्यावरण बहाली के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। नगर निगम में पर्यावरण सेल गठित कर प्रशिक्षित अधिकारियों की नियुक्ति भी अनिवार्य की गई है। ट्रिब्यूनल ने कचरा पृथक्करण, रिसाइकलिंग, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और कम्पोस्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही निर्माताओं और ब्रांड कंपनियों को पैकेजिंग कचरे के निपटान में आर्थिक सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।
निकायों पर लगेगा पर्यावरण मुआवजा
दस लाख रुपये प्रति माह
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों को प्रति माह 10 लाख रुपये राशि देनी होगी, यदि वे नियमों का पालन करने में विफल रहते हैं।
पांच लाख रुपये प्रति माह
पांच से दस लाख की आबादी वाले निकायों पर यह जुर्माना लगेगा।
एक लाख रुपये प्रति माह
अन्य छोटे स्थानीय निकायों के लिए यह राशि तय की गई है।
पांच से दस लाख रुपये प्रति माह
गंदे पानी को सीधे जल निकायों में छोड़ने या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न लगाने पर पांच से दस लाख रुपये प्रति माह देना होगा। यह जुर्माना प्रति प्लांट या नाला के अनुसार होगा।
