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'शंकराचार्य से सबूत मांगना प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन...', स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को यूपी सरकार के नोटिस पर उमा भारती का बड़ा बयान

Published: Tue, 27 Jan 2026 05:07 PM (IST)

प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार के विवाद पर उमा भारती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रशासन ...और पढ़ें

उमा भारती (फाइल फोटो)

उमा भारती (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच उपजा विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है। इस मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे व तर्क हैं। इसको लेकर अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से ‘शंकराचार्य होने के सबूत’ मांगने को पूरी तरह अनुचित और मर्यादा का उल्लंघन करार दिया है।

यह कहा उमा भारती ने

उमा भारती ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा- ' मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।'  अपनी इस पोस्ट में उमा भारती ने बीजेपी एमपी, बीजेपी यूपी, यूपी सीएम ऑफिस और ज्योतिर्मठ को भी टैग किया है।

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अपने रुख पर दी सफाई

उनकी इस पोस्ट से ध्वनित हुआ कि उमा भारती उप्र प्रशासन के रुख की आलोचना करने के साथ-साथ योगी सरकार पर भी निशाना साध रही हैं। हालांकि जब इसको लेकर विवाद बढ़ा तो उमा भारती ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए 'एक्स' पर एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि योगी विरोधी खुश फहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है, मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे, लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।