नाना पाटेकर का भोपाल से था खास जुड़ाव: 'राजनीति' की शूटिंग के दौरान खाना पकाने से शादी समारोह तक... यादों में बसे हैं ये अनमोल पल
नाना पाटेकर का भोपाल से गहरा रिश्ता रहा है, जहां उन्होंने फिल्मों की शूटिंग के अलावा स्थानीय कलाकारों और रंगकर्मियों ...और पढ़ें

नाना पाटेकर (फाइल फोटो)
HighLights
नाना पाटेकर का भोपाल से फिल्मों से परे गहरा जुड़ाव था।
उन्होंने 'राजनीति' के सेट पर खुद खाना बनाकर सबको खिलाया।
कलाकारों और प्रशंसकों के साथ उनका व्यवहार हमेशा सहज रहा।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। नाना पाटेकर का भोपाल से रिश्ता सिर्फ फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। वे अलग-अलग मौकों पर शहर आए और यहां काम करने वाले कलाकारों, रंगकर्मियों और फिल्म से जुड़े लोगों से उनका आत्मीय जुड़ाव बना। किसी ने उन्हें मंच पर सहजता से घबराहट दूर करते देखा, तो किसी ने शूटिंग के दौरान उनके अभिनय की बारीकियां और सादगी महसूस की।
किसी के लिए वे सेट पर साथ खाना बनाने और खिलाने वाले सहकर्मी थे, तो किसी ने उन्हें इंसानियत और समाजसेवा की बात करते हुए करीब से जाना। नाना के निधन के बाद भोपाल से जुड़ी उनकी ये मुलाकातें और उनसे जुड़े किस्से लोगों की स्मृतियों में फिर ताजा हो गए हैं।
मुझे घबराई देख पूछा - सब ठीक है
स्टोन आर्टिस्ट अनिता दुबे ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ हुई छोटी-सी मुलाकात उनकी जीवनभर की सुनहरी यादों में शामिल है। वर्ष 1991-92 में वे आकाशवाणी भोपाल में कैजुअल अनाउंसर थीं। इसी दौरान उन्हें मप्र फिल्म विकास निगम के फिल्मोत्सव में एंकरिंग का मौका मिला। कार्यक्रम में नाना पाटेकर को फिल्म ‘प्रहार’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम से पहले कलाकारों को मंच पर आने का क्रम समझाते समय वे नाना पाटेकर के प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने हिचक गईं। उनकी घबराहट देखकर नाना ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब ठीक है।” उनके इन शब्दों से अनिता का डर दूर हो गया और आत्मविश्वास लौट आया।
मंच से हर बार उनका नाम लेने पर दर्शकों की तालियों के बीच नाना भी मुस्कुराते थे। अनिता ने बताया कि उनकी कही एक बात आज भी मन में अंकित है, “किसी के काम को पुरस्कार मिलना उसे और अच्छा काम करने की प्रेरणा देता है।” स्पष्ट विचार और सहज अभिव्यक्ति वाले नाना पाटेकर उन्हें एक नायाब कलाकार लगे।
‘राजनीति’ के सेट पर सहजता ने जीता दिल
वरिष्ठ रंगकर्मी कमल जैन ने बताया कि उन्होंने फिल्म ‘राजनीति’ में शुक्ला विधायक का किरदार निभाया था, जो मनोज बाजपेयी का अंधभक्त था। फिल्म में उनका एक दृश्य नाना पाटेकर के साथ था, जिसमें नाना उन्हें उनका चुपके से बनाया गया वीडियो दिखाकर कहते हैं, “अब बोलो शुक्ला जी।” इस पर वे घबरा जाते हैं और नाना के पैर पकड़कर गलती के लिए माफी मांगते हैं।
कमल जैन बताते हैं कि दृश्य में उन्हें दो बार ‘डन’ कहना था, लेकिन अभिनय के प्रवाह में उनके मुंह से ‘डन डना डन डन’ निकल गया। नाना हर शॉट के बाद कैमरे में क्लिप देखते थे। उन्हें यह बात खटकी और उन्होंने निर्देशक प्रकाश झा से दृश्य दोबारा करने को कहा। रीटेक में भी कमल जैन ने वही संवाद बोल दिया। प्रकाश झा को यह स्वाभाविक लगा, जिसके बाद नाना ने दृश्य को मंजूरी दे दी।
कमल जैन बताते हैं कि नाना पाटेकर को प्रकृति से बहुत प्रेम था। भोपाल की हरियाली और तालाब उन्हें बेहद पसंद थे। वे अक्सर कहते थे कि भोपाल के लोग बहुत भाग्यशाली हैं, जो जन्नत में रहते हैं। कमल जैन ने बताया कि नाना के साथ दृश्य करने से पहले वे उनकी गुस्सैल छवि के कारण काफी घबराए हुए थे, लेकिन सेट पर नाना बेहद सहज रहे। उन्होंने कभी यह अहसास नहीं होने दिया कि वे इतने बड़े कलाकार हैं।
खाना बनाकर पूरी यूनिट को खिलाते थे नाना
राजनीति फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे जोहेब अली ने बताया कि इस फिल्म से ही हमारी कंपनी जील जेड एंटरटेनमेंट प्रा.लि की शुरुआत हुई थी। तब मैंने डायरेक्शन में कदम रखा था और भाई सैयद जैद अली ने प्रोडक्शन का काम संभाला था। नाना पाटेकर के साथ तब काम करने का मौका मिला।
दो महीने पहले ही हमने उनके साथ फिल्म शक्तिशालिनी की शूटिंग पूरी की, जो अभी रिलीज नहीं हुई है। मेरे पिता जुल्फिकार अली साहब से उनकी अच्छी जान-पहचान थी। वे अक्सर फोन पर बातें किया करते थे। जब नाना की 'वनवास' फिल्म रिलीज हुई तो उन्होंने पिताजी को फोन कर पूछा कि आपने फिल्म देखी क्या? जाकर देखें और मुझे बताएं कि भोपाल के थियेटर में फिल्म को लेकर क्या रिस्पान्स है।
जोहेब अली बताते हैं, राजनीति फिल्म के दौरान नाना जहांनुमा पैलेस होटल में रुके थे। उन्हें खाना पकाने का बहुत शौक है, तो उन्होंने कहा कि मुझे होटल में खाना बनाना है। होटल के रूल्स के मुताबिक ये इजाजत नहीं थी, लेकिन नाना के लिए हमने स्पेशल परमिशन ली और उनके लिए किचन में स्पेस बनाया गया। नाना कभी कीमा और कलेजी बनाते तो कभी मटन पाया बनाकर शूटिंग लोकेशन पर लाते और सभी को खिलाते। जब उन्हें मैंने बताया कि मेरे कजिन की शादी है तो उन्होंने कहा कि मुझे भोपाल की शादी देखनी है। वे शादी में गए और उन्हें खूब मजा आया।
सैयद जैद अली बताते हैं, नाना के बारे में मैंने सुन रखा था कि वे बहुत गुस्से वाले हैं, लेकिन मेरा अनुभव उनके साथ बिल्कुल विपरीत रहा। उन्होंने हमेशा बहुत प्यार से बात की।
महादेव नदी कथा में देने वाले थे आवाज
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि 1991-92 में मप्र फिल्म विकास निगम ने मप्र फिल्मोत्सव का उद्घाटन किया था। उस समय वे निगम में महाप्रबंधक थे। रवींद्र भवन में हुए इस कार्यक्रम में हिंदी सिनेमा के 1991 के राष्ट्रीय पुरस्कारों का वितरण भी किया गया था।
नाना पाटेकर को फिल्म ‘प्रहार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया था। तब नाना ने मंच से कहा था कि यह पुरस्कार उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए मिला है, ताकि वे और बेहतर काम कर सकें। उन्होंने ‘प्रहार’ को अपना विचार बताते हुए कहा था कि उन्होंने कभी पैसों के लिए काम नहीं किया।
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श्रीराम तिवारी ने बताया कि 1995 में मप्र फिल्म विकास निगम बंद हुआ, तब सिनेमा से मेरा वैसा रिश्ता नहीं रहा, लेकिन हमारी मेल-मुलाकातें चलती रही। वे कई वर्षों से समाजसेवा में सक्रिय थे, जो मायानगरी में रहते हुए करना आसान नहीं। उज्जैन के विक्रमोत्सव में ‘महादेव नदी कथा’ की प्रस्तुति के लिए हमारी नाना से बात हुई थी। वे अपने अंदाज और आवाज में महादेव की कथा सुनाने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश यह प्रस्तुति नहीं हो सकी। नाना का निधन कला और समाज के लिए स्थायी क्षति है। हमने अपने खजाने का एक मूल्यवान हीरा खो दिया।

व्यस्तता के बावजूद प्रशंसक से आत्मीयता
डॉ. मीना सक्सेना ने बताया कि उनके पति रवि सक्सेना जब फिल्म ‘राजनीति’ में काम कर रहे थे, तब फिल्म के सेट पर उनकी नाना पाटेकर से मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर व्यस्त और थके होने के बावजूद उनसे बेहद आत्मीयता, सहजता और मुस्कान के साथ मिले। जब उनके पति ने बताया कि वे नाना पाटेकर की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं, तो नाना ने पूरे अपनत्व के साथ उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। ये तस्वीरें पुरानी विधानसभा में लगे ‘राजनीति’ फिल्म के सेट की हैं।

महू की शूटिंग रेंज में सुनाए फिल्मों के संवाद
सैयद हारुन रशीद बताते हैं कि नाना पाटेकर से उनकी मुलाकात महू की शूटिंग रेंज में हुई थी। उन्हें और नाना पाटेकर, दोनों को ही शूटिंग का शौक था। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि नाना पाटेकर भी मौजूद हैं। मुलाकात के बाद करीब तीन-चार घंटे तक दोनों साथ रहे। उन्होंने नाना से उनकी किसी फिल्म का संवाद सुनाने का आग्रह किया, तो नाना ने ‘क्रांतिवीर’ और ‘यशवंत’ के संवाद सुनाए। उन्हें सामने से नाना को संवाद बोलते देखना यादगार अनुभव लगा। हारुन बताते हैं कि बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने इंसानियत पर जोर दिया और समझाया कि एक-दूसरे की मदद से ही इंसानियत को जिंदा रखा जा सकता है।
