MP के सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर की बदलेगी तस्वीर, अभयारण्य नहीं अब कंजर्वेशन रिजर्व बनाने की तैयारी; बाघों की राह होगी सुरक्षित
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर को अब अभयारण्य की जगह कंजर्वेशन रिजर्व बनाया जाएगा। यह कदम ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर बनेगा मध्य प्रदेश का तीसरा कंजर्वेशन रिजर्व।
वन्यजीवों की सुरक्षा और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा नए दर्जे से।
खदानों को बंद करने और गांवों को विस्थापित करने की नौबत नहीं।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए बालाघाट जिले के सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर को कंजर्वेशन रिजर्व बनाने की तैयारी की जा रही है। लालबर्रा क्षेत्र में स्थित करीब 163.195 वर्ग किलोमीटर के इस वन क्षेत्र को संरक्षण का नया दर्जा मिलने से वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास और उनके आवाजाही के रास्तों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि इस व्यवस्था में आसपास की खदानों को बंद करने और गांवों को विस्थापित करने की नौबत भी नहीं आएगी।
शासन ने सोनेवानी को कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्ताव साकार होने पर यह मध्य प्रदेश का तीसरा कंजर्वेशन रिजर्व होगा। इससे पहले बैतूल जिले में ताप्ती और विदिशा जिले में कागपुर कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किए जा चुके हैं।
अभयारण्य बनाने की योजना क्यों बदली?
सोनेवानी को पहले अभयारण्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन आसपास संचालित खदानों के मालिकों की आपत्तियों के चलते इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अभयारण्य बनने की स्थिति में प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन के दायरे में ये खदानें आ रही थीं। इसके अलावा, वन क्षेत्र के भीतर बसे कई गांवों के विस्थापन की आशंका भी थी।
इन चुनौतियों को देखते हुए अब कंजर्वेशन रिजर्व का विकल्प चुना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत वन्यजीवों के आवास और उनके कॉरिडोर के संरक्षण पर ध्यान दिया जा सकेगा, वहीं आसपास की खदानों और स्थानीय गांवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।
163 वर्ग किमी क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर
सोनेवानी टाइगर कॉरिडोर को कंजर्वेशन रिजर्व बनाने का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और उनके आवागमन में आने वाली बाधाओं को कम करना है। इसके साथ ही मानवीय गतिविधियों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए संरक्षण आधारित प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
टाइगर कॉरिडोर के संरक्षण से वन्यजीवों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे वन क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
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ताप्ती और कागपुर में भी संरक्षण की पहल
प्रदेश में कंजर्वेशन रिजर्व के विस्तार की दिशा में पहले भी कदम उठाए गए हैं। बैतूल जिले में 20 अगस्त 2025 को दक्षिण एवं पश्चिम सामान्य वनमंडल के बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही तहसीलों के अंतर्गत 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया था।
इसके बाद 25 अगस्त 2026 को विदिशा जिले की विदिशा तहसील के कागपुर और गढ़ला गांवों के जलीय क्षेत्र के 0.535 वर्ग किलोमीटर हिस्से को कागपुर पक्षी कंजर्वेशन रिजर्व का दर्जा दिया गया।
अब इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सफारी शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए पर्यटकों से प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
