MP में मौसम का यू-टर्न: उत्तर-पूर्वी इलाकों में छाए बादल; ग्वालियर-शिवपुरी समेत सात जिलों में बौछारें पड़ने के आसार
मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव आ रहा है, जिससे उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में बादल ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
पश्चिमी विक्षोभ से मध्य प्रदेश में बदलेगा मौसम।
उत्तरी-पूर्वी जिलों में 15-17 अक्टूबर तक बारिश संभव।
रात के तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में दिन के समय गर्मी और रात में हल्की ठंड के बीच मौसम का मिजाज फिर बदलने वाला है। उत्तरी पाकिस्तान से आ रहा पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में आगे बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में मौसम प्रणाली सक्रिय हो गई है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई इलाकों में बादल छाने लगे हैं, जिससे रात के तापमान में भी 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने 15 से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के उत्तरी, पूर्वी और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम में इस बदलाव का असर अगले तीन दिनों तक बने रहने का अनुमान है।
इन जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञानी बीएस यादव के मुताबिक, गुरुवार 15 अक्टूबर को मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुरकलां जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम में अचानक बदलाव के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं, प्रदेश के शेष हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है।
दो दिन और जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 16 अक्टूबर को प्रदेश के 16 जिलों में और 17 अक्टूबर को 11 जिलों में बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा का सिलसिला जारी रह सकता है।
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रात की ठंडक पर भी पड़ेगा असर
प्रदेश में अब तक दिन और रात के तापमान में अंतर महसूस किया जा रहा था। लेकिन बादल छाने से रात के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक उछाल आया है। इससे रात में महसूस होने वाली ठंडक कुछ कम हो सकती है। अगले तीन दिनों में मौसम का असर किन इलाकों में कितना रहेगा, यह स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
