कचरा वाहन से LED लाइट तक… MP के नगरीय निकायों में खरीदी पर उठे गंभीर सवाल; 1,134 करोड़ के खर्च की होगी जांच
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरतों के लिए की गई खरीदी में कीमतों का ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
नगरीय निकायों में खरीदी गई सामग्री की कीमतों में भारी अंतर।
LED लाइट, कचरा वाहनों की खरीद में कई गुना अधिक भुगतान।
मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश के नगरीय निकायों में सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरतों के लिए की गई खरीदी में कीमतों का बड़ा अंतर सामने आया है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुई खरीद के विश्लेषण में पता चला कि एक जैसी सामग्री के लिए अलग-अलग निकायों ने कई गुना तक अधिक भुगतान किया। आंकड़ों के मुताबिक, कहीं एलईडी लाइट 306 रुपये में खरीदी गई, तो कहीं उसी तरह की लाइट के लिए 11,800 रुपये चुकाए गए। कचरा वाहनों की खरीद में भी कीमतों का बड़ा अंतर सामने आया है।
मामला सामने आने के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही है। विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने गुरुवार को कहा कि प्रसारित वीडियो और खरीद से जुड़े तथ्यों के आधार पर जांच कराई जाएगी। यदि कोई अधिकारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
औसत दर पर खरीद होती तो बच सकते थे करोड़ों
भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने निकायों की खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बैठक में सभी नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, संचालक और विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
कार्यशाला में प्रस्तुत विश्लेषण के अनुसार, प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने तीन वर्षों में जेम पोर्टल के माध्यम से करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी की। आंकड़ों के विश्लेषण में अनुमान जताया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता, तो लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये तक की बचत संभव थी। हालांकि, यह बचत विश्लेषण पर आधारित अनुमान है, जांच में प्रमाणित वित्तीय नुकसान का आंकड़ा नहीं।
दो लाख का कचरा वाहन, कहीं अतिरिक्त सामान जोड़कर छह लाख का सौदा
कार्यशाला के प्रसारित वीडियो में संजय दुबे उदाहरण देते हुए बताते सुनाई दे रहे हैं कि कहीं कचरा वाहन करीब दो लाख रुपये में खरीदा गया, जबकि कहीं चार डस्टबिन जोड़कर उसकी कीमत छह लाख रुपये तक पहुंच गई। कुछ नगरीय निकायों में जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के अनुपात पर भी सवाल उठे। बताया गया कि कुछ निकायों ने करोड़ों रुपये के कचरा वाहन खरीद लिए, जबकि उन्हें चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड या काम की जरूरत पर प्रश्न उठते हैं।
सफाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतों में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया। विभागीय अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया गया कि अतिरिक्त सामग्री या सुविधाओं के नाम पर एक जैसे उत्पादों की कीमतें कई गुना तक बढ़ती दिखाई दीं।
इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम ने रखे खरीद के आंकड़े
मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम के अपर संचालक अंशुमन राज ने कार्यशाला में जेम पोर्टल के जरिए हुई खरीदी के आंकड़े और उनका विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसमें एक जैसी सामग्री की अलग-अलग दरों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। अब जांच में यह देखना अहम होगा कि कीमतों के अंतर के पीछे उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, अतिरिक्त सुविधाओं या खरीद प्रक्रिया में किसी अनियमितता की भूमिका थी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग
खरीदी में कीमतों के अंतर का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने इसे भ्रष्टाचार के संभावित प्रमाण बताते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है।
वहीं, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा है कि जेम पोर्टल पर हुई खरीद, उत्पादों की कीमतों में अंतर और अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच होगी। अब निगाहें जांच पर हैं, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि कीमतों में अंतर के पीछे सामान्य व्यावसायिक कारण थे या सरकारी खरीद में नियमों की अनदेखी हुई।
