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MP के नगरीय निकायों में सामग्री खरीद घोटाले के बीच रिश्वत के मामले भी चर्चा में; 6 माह में 5 अधिकारी-कर्मचारियों को पकड़ा

Published: Mon, 26 Oct 2026 08:58 PM (IST)

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीद घोटाले के साथ अब रिश्वतखोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. छह माह में पांच अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए।

  2. रायसेन, मंडला सहित कई निकायों में कार्रवाई हुई।

  3. 2013 से 59 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीद में भ्रष्टाचार के मामले के बीच अब रिश्वतखोरी के मामले भी चर्चा में हैं। पिछले छह माह में (अप्रैल से सितंबर के बीच) लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में निकायों में पांच अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं।

रायसेन जिले की नगर परिषद उदयपुरा के उपयंत्री और नगर पालिका मंडला के सीएमओ दो-दो लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे। वहीं, नगर पालिका नरसिंहपुर के लिपिक को 25 हजार और जबलपुर की पनागर नगर परिषद के उपयंत्री व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।

कहीं सुरक्षा निधि तो कहीं भुगतान और प्रमाणपत्र के बदले रिश्वत के आरोप

इस तरह अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चार मामलों में पांच अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए थे। इन मामलों में निर्माण कार्य की सुरक्षा निधि और अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने, ठेकेदार के भुगतान के बाद एफडीआर व बैंक गारंटी लौटाने, निर्माण कार्य से जुड़े मामलों और नल-जल योजना के काम के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप हैं।

2013 से अब तक 59 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में

वर्ष 2013 से अभी तक नगरीय निकायों के 59 अधिकारी- कर्मचारी लोकायुक्त व ईओडब्ल्यू की जांच में घिरे हैं। विभाग से अभियोजन स्वीकृति मिलने पर इन मामलों में कोर्ट में चालन प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें अधिकतर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए हैं, तो कुछ के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला है। इसमें नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत तीनों के अधिकारी-कर्मचारी हैं।

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महंगी दरों पर सामग्री खरीदी के मामलों में भी जांच शुरू

उधर, विभिन्न निकायों में महंगी दरों पर सामग्री खरीद के ताजा मामले में विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त (एसपीई) ने स्वत: संज्ञान लेकर जांच प्रारंभ की है। एसपीई के महानिदेशक योगेश देशमुख ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग से पूरी जानकारी मांगी जा रही है। दस्तावेज का परीक्षण करने के बाद प्रकरण कायम किया जाएगा। इस संबंध विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा लोकायुक्त संगठन द्वारा जो भी जानकारी मांगी जाएगी, उपलब्ध कराएंगे।