MP के नगरीय निकायों की खरीदी में 250 करोड़ की गड़बड़ी पर विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मौन; विपक्ष ने सरकार को घेरा
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी में करीब 250 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई हैं, जिसका खुलासा ...और पढ़ें

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय। (फाइल फोटो)
HighLights
₹250 करोड़ की खरीदी गड़बड़ी AI विश्लेषण से उजागर।
392 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई, लोकायुक्त जांच शुरू।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की चुप्पी पर विपक्ष के सवाल।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी के दौरान करीब 250 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। ई-नगर पालिका पोर्टल और जेम पोर्टल के आंकड़ों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से विश्लेषण करने पर खरीदी के रिकॉर्ड में बड़े अंतर सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद प्रदेश में 392 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि लोकायुक्त ने भी जांच शुरू कर दी है।
मामले में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करते रहे हैं। वहीं, विभाग के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है।
250 करोड़ की गड़बड़ी, एआई विश्लेषण से सामने आया अंतर
विभागीय स्तर पर ई-नगर पालिका और जेम पोर्टल के आंकड़ों का मिलान कर खरीदी से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदी में करीब 250 करोड़ रुपये की अनियमितताओं के संकेत मिले। इसके बाद संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
इस मामले में लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने भी स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू की है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि अनियमितताओं की प्रकृति क्या थी, किन स्तरों पर जिम्मेदारी बनती है और सरकारी धन को कितना नुकसान हुआ।
अप्रैल में भोपाल में नगरीय निकायों के अधिकारियों की कार्यशाला के दौरान अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस मामले को सामने रखा था। इसके बाद से विभागीय कार्रवाई का मुद्दा लगातार चर्चा में है।
तीन साल की खरीदी पर सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग
करीब तीन साल की अवधि में हुई खरीदी से जुड़ी इतनी बड़ी अनियमितताओं के सामने आने के बाद निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी किन कारणों से हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा रही है। विपक्ष की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। वहीं, लोकायुक्त की जांच से यह पता चल सकेगा कि मामले में किन अधिकारियों या अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल जरूरी है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया का इंतजार
मामले में विभागीय अधिकारी कार्रवाई की जानकारी दे रहे हैं, लेकिन कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ओर से सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनसे प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन और वाट्सएप संदेश के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।
ऐसे में विभागीय खरीदी में सामने आई कथित गड़बड़ी पर सरकार का आधिकारिक पक्ष और भविष्य की कार्ययोजना जानने का इंतजार है। खास तौर पर यह सवाल अहम है कि खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और निगरानी मजबूत करने के लिए विभाग क्या बदलाव करेगा।
भागीरथपुरा मामले के बाद फिर मीडिया से दूरी
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सवाल पूछे जाने पर कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया भी पहले चर्चा में रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत कम कर दी थी।
सोमवार को भोपाल पहुंचने पर वह भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में कुछ समय के लिए शामिल हुए, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखी। इंदौर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जबकि नगरीय निकायों में खरीदी की कथित अनियमितताओं पर उनकी ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया।
