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MP में राज्यसभा की तीसरी सीट पर फंसा गणित: BJP को 8 वोटों की तलाश, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर

Published: Mon, 08 Jun 2026 11:08 PM (GMT+05:30)

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव रोचक हो गया है, जहां भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए 8 अतिरिक्त वोटों की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भाजपा तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए 8 अतिरिक्त वोट जुटा रही है।

  2. कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटी, क्रॉस वोटिंग का डर।

  3. राज्यसभा चुनाव में व्हिप कानूनी रूप से प्रभावी नहीं होता।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में पांच साल बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की स्थिति बनी है। भाजपा द्वारा तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारे जाने के बाद सियासी समीकरण अचानक रोचक हो गए हैं। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में दिखाई देती है, लेकिन भाजपा तीसरी सीट पर जीत का दावा करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त वोट जुटाने में सक्रिय हो गई है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को साधने और एकजुट रखने में जुटे हैं।

वर्तमान में 230 सदस्यीय विधानसभा की एक सीट रिक्त है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 229 रह गई है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 मतों की आवश्यकता होती है।

क्या कहता है विधानसभा का गणित?

विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं। इस आधार पर पार्टी दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। दो उम्मीदवारों को विजयी बनाने के बाद भाजपा के पास 48 वोट शेष बचेंगे।

दूसरी ओर कांग्रेस के पास 58 से अधिक वोट मौजूद हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। हालांकि भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए लगभग आठ अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। पार्टी को उम्मीद है कि बीना से विधायक निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार का समर्थन उसे मिल सकता है। इन दोनों के समर्थन को जोड़कर भाजपा अपने पक्ष में करीब 50 वोट मानकर चल रही है। ऐसे में जीत के लिए उसे अभी भी कुछ अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।

कांग्रेस को क्यों सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर?

भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए कांग्रेस खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुटी है। यही कारण है कि पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ रखने की रणनीति बनाई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक प्रबंधन भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग या मतदान के दिन अनुपस्थिति चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

कैसे होती है वोटों की गणना?

विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह के अनुसार राज्यसभा चुनाव में सबसे पहले प्रथम वरीयता के मतों की गणना की जाती है। यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित 58 वोट मिल जाते हैं तो वह निर्वाचित घोषित हो जाता है और आगे की गणना की आवश्यकता नहीं रहती। जरूरत पड़ने पर द्वितीय वरीयता के मतों को भी देखा जा सकता है।

राज्यसभा चुनाव में व्हिप क्यों नहीं होता प्रभावी?

राज्यसभा चुनाव की सबसे खास बात यह है कि इसमें व्हिप का कानूनी प्रभाव नहीं होता। यदि कोई विधायक क्रॉस वोटिंग करता है या मतदान के दिन अनुपस्थित रहता है तो उसके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।

विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसरानी बताते हैं कि राज्यसभा चुनाव सदन के भीतर नहीं, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत कराया जाता है। इसलिए इसे व्हिप के दायरे में नहीं माना जाता। हालांकि राजनीतिक दल अपने स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन विधायक की सदस्यता पर इसका असर नहीं पड़ता।

ऐसे में 18 जून को होने वाला राज्यसभा चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, प्रबंधन और विधायकों की निष्ठा की भी परीक्षा माना जा रहा है।

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