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बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के नजदीक खनन परियोजनाओं की मंजूरी पर गरमाई सियासत, जीतू पटवारी ने सरकार से मांगा जवाब

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:59 PM (IST)

बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के पास कोयला खनन परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी मिलने पर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो ...और पढ़ें

जीतू पटवारी व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।

जीतू पटवारी व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।

HighLights

  1. बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर के पास खनन परियोजनाओं को मंजूरी।

  2. जीतू पटवारी ने सरकार से पर्यावरणीय मंजूरी पर सवाल किए।

  3. वन्यजीव संरक्षण और खनन गतिविधियों पर बहस तेज हुई।

डिजिटल डेस्क, उमरिया। बांधवगढ़ से छत्तीसगढ़ के अचानकमार तक फैले बाघों के प्राकृतिक आवागमन क्षेत्र के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को मिल रही पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। उमरिया जिले में प्रस्तावित वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार से सवाल किए हैं।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित परियोजना बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर से करीब छह किलोमीटर दूर है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने 8 और 9 सितंबर को हुई बैठकों में परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दिए जाने की सिफारिश की है। जुलाई 2026 के बाद यह चौथी कोयला परियोजना बताई जा रही है, जो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया में आगे बढ़ी है।

कॉरिडोर के आसपास 53 मीटर से 6 किमी तक खनन परियोजनाएं

रिपोर्ट के मुताबिक बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के आसपास कई कोयला परियोजनाएं प्रस्तावित या स्वीकृत प्रक्रिया में हैं। इनमें मरवाटोला-सात खदान कॉरिडोर से महज 53 मीटर, पाथोरा ईस्ट करीब 1.5 किलोमीटर, अर्जुनी वेस्ट करीब 3.9 किलोमीटर और वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन करीब 6 किलोमीटर दूर बताई गई है।

वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) परियोजना का प्रस्तावित खनन लीज क्षेत्र 1,400 हेक्टेयर से अधिक बताया गया है।

पटवारी ने सरकार से उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने खनन परियोजनाओं और टाइगर कॉरिडोर की निकटता का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब यह क्षेत्र बाघों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, तो इसके आसपास खनन गतिविधियों को अनुमति देने का आधार क्या है।

यह मामला अब केवल एक प्रस्तावित कोयला खदान तक सीमित नहीं रह गया है। कॉरिडोर के आसपास अलग-अलग दूरी पर खनन परियोजनाओं का जिक्र सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण और खनन गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हुई है।

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पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में आगे बढ़ी परियोजना

विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की सितंबर में हुई बैठक में वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन के पर्यावरणीय स्वीकृति प्रस्ताव पर विचार किया गया। समिति की सिफारिश के बाद परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।