आरक्षक से DSP तक बदलेगी पुलिस की ट्रेनिंग, जनता से व्यवहार सुधारने पर भी रहेगा फोकस; नए सत्र से शुरुआत की तैयारी
पुलिस प्रशिक्षण में अब सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव और व्यवहार सुधार पर जोर दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
मैदान पर व्यावहारिक अनुभव और जनता से संवाद सुधार पर जोर।
AI, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण का अहम हिस्सा।
मध्य प्रदेश में नए प्रशिक्षण सत्र से लागू करने की तैयारी।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। पुलिस प्रशिक्षण में अब पढ़ाई के साथ मैदान में उतरकर काम सीखने पर भी जोर दिया जाएगा। वीवीआईपी ड्यूटी, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषयों को केवल कक्षा में पढ़ाने के बजाय प्रशिक्षुओं को मौके पर ले जाकर व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा। इससे वे नौकरी के दौरान आने वाली चुनौतियों को पहले से समझ सकेंगे। आरक्षक से लेकर डीएसपी स्तर तक के पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में व्यवहार, कार्यशैली और जनता के साथ संवाद को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) ने आदर्श पुलिस प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। इसे सभी राज्यों को भेजा गया है। उद्देश्य देशभर की पुलिस के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में एकरूपता लाने के साथ बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप पुलिसकर्मियों को तैयार करना है।
कक्षा के साथ मैदान में भी होगी ट्रेनिंग
अब तक वीवीआईपी सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी से जुड़े विषय प्रशिक्षण के दौरान पढ़ाए जाते रहे हैं, लेकिन उनका वास्तविक अनुभव कई पुलिसकर्मियों को नौकरी में आने के बाद मिलता है। नए मॉड्यूल में इस अंतर को कम करने की कोशिश की गई है। प्रशिक्षुओं को संबंधित परिस्थितियों में ले जाकर ड्यूटी की प्रक्रिया, समन्वय और मौके पर आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों से परिचित कराया जाएगा।
प्रशिक्षण का मकसद केवल पुलिसकर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली में सुधार लाना भी है। जनता से संवाद, जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई और दबाव की स्थिति में निर्णय लेने जैसे पहलुओं पर भी जोर रहेगा।
AI और साइबर सुरक्षा भी पाठ्यक्रम का हिस्सा
अपराध के बदलते तरीकों और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आदर्श मॉड्यूल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल, अपराधों की जांच और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाया गया है। तनावपूर्ण ड्यूटी और काम के दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से उनकी कार्यक्षमता और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
सेमेस्टर परीक्षा के बीच स्कूलों की तरह होंगे टेस्ट
प्रशिक्षण व्यवस्था में नियमित मूल्यांकन को भी महत्व दिया जाएगा। सेमेस्टर परीक्षाओं के बीच स्कूलों की तरह टेस्ट आयोजित करने की व्यवस्था प्रस्तावित है, ताकि यह पता चलता रहे कि प्रशिक्षु विषयों को कितना समझ रहे हैं और उन्हें किन क्षेत्रों में अतिरिक्त मार्गदर्शन की जरूरत है।
राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से आदर्श मॉड्यूल में अतिरिक्त विषय जोड़ने की छूट भी दी गई है। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण की बुनियादी रूपरेखा समान रहेगी, जबकि राज्यों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार उसे उपयोगी बनाने का अवसर मिलेगा।
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MP में नए प्रशिक्षण सत्र से लागू करने की तैयारी
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने नए मॉड्यूल को मौजूदा पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्पेशल डीजी (ट्रेनिंग) रवि गुप्ता के अनुसार, प्रदेश में पहले से लागू प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के साथ बीपीआरएंडडी के सुझाए गए विषयों को समाहित किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में नए प्रशिक्षण सत्र से उप निरीक्षकों के प्रशिक्षण में इसे लागू करने की तैयारी है। इससे पुलिसकर्मियों को अपराधों की जांच, नई तकनीकों के उपयोग और मैदानी ड्यूटी की वास्तविक चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में मदद मिलेगी।
