MP पुलिस में 45 हजार जवानों की कमी, एक लाख लोगों पर सिर्फ 122 पुलिसकर्मी; केंद्र ने रिक्त पद भरने को कहा
मध्य प्रदेश में पुलिस बल की भारी कमी है, जहां मौजूदा आबादी के अनुपात में लगभग 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
MP पुलिस में 45 हजार अतिरिक्त जवानों की आवश्यकता।
प्रति लाख आबादी पर केवल 122 पुलिसकर्मी उपलब्ध।
केंद्र ने पुलिस विभाग में रिक्त पद भरने पर दिया विशेष जोर।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती आबादी के अनुपात में पुलिस बल की कमी कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रदेश में मौजूदा आबादी के हिसाब से करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत बताई गई है। वर्तमान में हर एक लाख लोगों पर औसतन 121.76 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 143 है। वहीं, देश में प्रति लाख आबादी पर पुलिसकर्मियों की स्वीकृत संख्या 197 बताई गई है।
पुलिस बल की कमी का असर अपराधों की रोकथाम, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक मामलों की विवेचना पर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भोपाल दौरे के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान हुई थी।
तीन साल में 22,500 आरक्षकों की भर्ती का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही अगले तीन वर्षों में आरक्षकों के 22,500 पदों पर भर्ती करने की घोषणा कर चुके हैं। फिलहाल प्रदेश में 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, प्रस्तावित भर्तियों के बावजूद पुलिस बल की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे।
इसके लिए एक ओर मौजूदा रिक्त पदों को भरना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आबादी में वृद्धि और पुलिस व्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए नए पद भी सृजित करने पड़ सकते हैं। करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की आवश्यकता का आकलन इसी आबादी-आधारित अंतर को ध्यान में रखकर किया गया है।
स्वीकृत पदों और तैनात पुलिसकर्मियों में बड़ा अंतर
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों की उपलब्धता के मामले में स्थिति कई राज्यों से बेहतर है, लेकिन स्वीकृत पदों की तुलना में वास्तविक संख्या कम है। यही अंतर पुलिस व्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है।
ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) की रिपोर्ट पर आधारित केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 को देश में प्रति एक लाख आबादी पर पुलिसकर्मियों की स्वीकृत संख्या 197 थी, जबकि वास्तविक उपलब्धता 152.80 थी। यानी राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृत बल और वास्तव में उपलब्ध पुलिसकर्मियों के बीच अंतर बना हुआ है।
2011 में 18 हजार पदों की कमी, अब 45 हजार
वर्ष 2011 की जनगणना के समय मध्य प्रदेश की आबादी करीब 7.60 करोड़ थी। उस समय पुलिस विभाग में लगभग 18 हजार पदों की कमी बताई गई थी। इसके बाद आबादी बढ़ने के साथ पुलिसकर्मियों की आवश्यकता भी बढ़ती गई।
अब प्रदेश की वर्तमान आबादी के अनुपात में करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत का आकलन किया गया है। ऐसे में पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज करने के साथ नए पदों के सृजन पर भी ध्यान देना होगा।
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भर्ती से कानून-व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद
पुलिस बल में पर्याप्त संख्या होने से अपराध नियंत्रण, गश्त, जांच और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने में मदद मिल सकती है। फिलहाल 9,662 पदों पर जारी भर्ती और अगले तीन वर्षों में 22,500 आरक्षकों की भर्ती की घोषणा के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश में पुलिसकर्मियों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए आगे कितने अतिरिक्त पद स्वीकृत किए जाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से रिक्त पद भरने पर दिए गए जोर के बाद अब पुलिस भर्ती और बल विस्तार को लेकर राज्य सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी।
