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MP में पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 3 जिलों में 121 मामले; राजस्थान से जुड़ रहे आरोपितों के तार

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:38 PM (GMT+05:30)

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर बीमा दावा राशि हड़पने का बड़ा ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।

  2. फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से बीमा दावा राशि का भुगतान किया गया।

  3. ग्वालियर, मुरैना, रतलाम में 121 मामले; राजस्थान से जुड़े तार।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की बीमा दावा राशि प्राप्त करने का व्यापक फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्वालियर, मुरैना और रतलाम जिलों में अब तक ऐसे 121 प्रकरण सामने आ चुके हैं। फर्जीवाड़ की जांच कर रही अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को 482 बैंक खातों पर संदेह है। इनमें ग्वालियर-मुरैना के 59 और रतलाम के 62 खातों से राशि निकालने की पुष्टि हो चुकी है, शेष में जांच जारी है।

राजस्थान तक जुड़े फर्जीवाड़े के तार

इस फर्जीवाड़े के तार राजस्थान से जुड़ रहे हैं। कुछ आरोपित राजस्थान के श्रीगंगानगर और धौलपुर के बताए जा रहे हैं। इन्हीं जिलों के एटीएम से बीमा दावा राशि भी निकाली गई थी। फर्जीवाड़े में निजी बैंकों के खाते इस्तेमाल किए जा रहे हैं। रतलाम में जिन 62 खाताधारकों की बीमा दावा राशि निकाली गई, वे सभी एक ही निजी बैंक के थे।

मृत्यु पर मिलते हैं 2 लाख रुपये

दरअसल, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में खाताधारक के बैंक खाते से प्रतिवर्ष 436 रुपये प्रीमियम काटा जाता है। दुर्घटना या सामान्य मृत्यु होने पर खाताधारक के नामित व्यक्ति को दो लाख रुपये की दावा राशि मिलती है। वर्ष 2024-2025 में आरोपितों ने फर्जीवाड़े के उद्देश्य से ही खाते खुलवाए और इनमें एक-दो किस्तें जमा करने के बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर दावा राशि स्वीकृत करा ली।

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ऐसे हुआ खुलासा

जांच में यह भी पता चला है कि आरोपितों ने नए खाते खुलवाने के साथ पहले से खुले खातों का भी दुरुपयोग किया है। कुछ खाताधारकों की मृत्यु के बाद दावा राशि लेने बैंक पहुंचे स्वजन को बताया गया कि उनके नाम पर दावा राशि पहले ही जारी हो चुकी है, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। सीआईडी की टीम फर्जीवाड़े में शामिल आरोपितों और उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।