MP में 27% OBC आरक्षण की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंची, मोहन सरकार ने लगाई विशेष अनुमति याचिका; 13% होल्ड पदों पर राहत की मांग
मप्र सरकार ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने और 13% होल्ड पदों को भरने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
मध्य प्रदेश सरकार ने 27% ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
सरकार ने ओबीसी आबादी के आंकड़ों को याचिका का प्रमुख आधार बताया।
तत्कालीन कमल नाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 27% किए जाने का बनाया था नियम।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल, याचिकाकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद शुक्रवार शाम राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर दी। सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ सरकारी भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों को ओबीसी अभ्यर्थियों से भरने की अनुमति मांगी है।
मुख्यमंत्री से मिले ओबीसी प्रतिनिधि
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री निवास पर हुई मुलाकात में ओबीसी प्रतिनिधियों ने सरकारी भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर अटके अभ्यर्थियों को जल्द राहत देने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में मामले की प्रभावी पैरवी करने का आग्रह भी किया।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कमल नाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद से ही अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े पदों और नियुक्तियों का मामला लंबित है।
ओबीसी आबादी के आंकड़ों को बनाया याचिका का आधार
राज्य सरकार ने अपनी SLP में प्रदेश में ओबीसी वर्ग की जनसंख्या और उसकी भागीदारी से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया है। याचिका में वर्ष 2011 की जनगणना और राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की वर्ष 2022 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी आबादी 50 से 51 प्रतिशत से अधिक है।
सरकार ने यह तर्क भी रखा है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग की संयुक्त आबादी प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 87 प्रतिशत है। याचिका के अनुसार, इतनी बड़ी आबादी की सामाजिक स्थिति और भागीदारी को ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले में इन परिस्थितियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
जनगणना के आंकड़े आने तक फैसले पर रोक की मांग
सरकार ने आगामी जनगणना के संभावित जातिगत आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। याचिका में मांग की गई है कि जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होने तक हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाई जाए और 13 प्रतिशत होल्ड पदों को ओबीसी अभ्यर्थियों से भरने की अनुमति दी जाए।
हालांकि, सरकार की इन मांगों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है। SLP दायर होने से फिलहाल होल्ड पदों पर नियुक्तियों को लेकर अपने आप कोई राहत लागू नहीं हो जाती।
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भाजपा और कांग्रेस भी बना रहीं रणनीति
ओबीसी आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम बना हुआ है। खबर के अनुसार, भाजपा से जुड़े कुछ लोग भी सुप्रीम कोर्ट में इंटरवीन यानी मामले में हस्तक्षेप करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है, जो इस मुद्दे पर पार्टी की आगे की रणनीति तय करेगी।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और सरकार की दलीलों पर आने वाला निर्णय यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि 27 प्रतिशत आरक्षण तथा 13 प्रतिशत होल्ड पदों को लेकर आगे क्या रास्ता निकलता है।
