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MP में OBC आरक्षण पर कांग्रेस का नया दांव; सुप्रीम कोर्ट जाएगी पार्टी

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:31 PM (IST)Updated: Mon, 12 Oct 2026 05:45 PM (IST)

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ओबीसी के 27% आरक्षण पर जबलपुर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। ...और पढ़ें

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी। (फाइल फोटो)

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कांग्रेस OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी।

  2. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जन-जागरण अभियान चलाएगी।

  3. सामाजिक संगठनों को आगे रखकर आंदोलन की रणनीति बनाई।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सियासी लड़ाई एक बार फिर तेज होने जा रही है। जबलपुर हाई कोर्ट के 27 प्रतिशत आरक्षण को अवैधानिक ठहराते हुए 2019 से पहले की 14 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था लागू रखने के फैसले को कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही पार्टी प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान भी चलाएगी।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति में सामाजिक संगठनों को आगे रखने का फैसला किया है। पार्टी सीधे तौर पर आंदोलन की अगुआई करने के बजाय पिछड़ा वर्ग के संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश करेगी। इसके पीछे दो प्रमुख रणनीतिक वजहें बताई जा रही हैं। पहली, OBC वर्ग को आरक्षण के मुद्दे पर एकजुट करना और दूसरी, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बीच किसी एक सामाजिक वर्ग के प्रति अधिक झुकाव का संदेश जाने से बचना।

पटवारी संभालेंगे अभियान की कमान, अंचलवार नेताओं को जिम्मेदारी

कांग्रेस की योजना ओबीसी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद कर उन्हें साझा मंच पर लाने की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस अभियान की कमान संभालेंगे। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय किया जाएगा।

निमाड़ अंचल: पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और सचिन यादव को जिम्मेदारी दी जाएगी।

विंध्य अंचल: पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और सिद्धार्थ कुशवाहा सक्रिय होंगे।

ग्वालियर-चंबल अंचल: राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह, दिनेश गुर्जर और लाखन यादव को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

इस रणनीति के तहत कांग्रेस सामाजिक संगठनों के जरिए आरक्षण के मुद्दे पर जनसमर्थन जुटाने और आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने की कोशिश करेगी।

कमल नाथ सरकार ने 2019 में 14 से 27 प्रतिशत किया था आरक्षण

मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण बढ़ाने का फैसला 2019 में तत्कालीन कमल नाथ सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले लिया था। अध्यादेश के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था।

हालांकि, आरक्षण बढ़ाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुईं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई के निर्देश दिए थे।

आरक्षण बढ़ाने के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहने के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सभी संबंधित मामलों में एक समान रूप से लागू नहीं हो सका।

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हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जबलपुर हाई कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल थे, ने आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने को असंवैधानिक ठहराया। अदालत ने कहा कि आरक्षण में इस वृद्धि को उचित ठहराने के लिए आवश्यक विशेष परिस्थितियां नहीं थीं। फैसले के अनुसार, प्रदेश में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत की व्यवस्था के तहत ही रहेगा।

इस निर्णय के बाद कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरक्षण के मुद्दे पर आगे कानूनी लड़ाई लड़ने की घोषणा की। कुछ संगठनों ने मामले में सरकार की पैरवी पर भी सवाल उठाए।

सामाजिक संतुलन पर भी नजर

कांग्रेस की रणनीति केवल अदालत में फैसले को चुनौती देने तक सीमित नहीं है। पार्टी सामाजिक संगठनों के माध्यम से ओबीसी वर्ग में अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के बीच सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी उसकी रणनीति का हिस्सा है।

अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित चुनौती और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद से आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को कितना समर्थन मिलता है। आने वाले दिनों में अंचलवार बैठकों और जन-जागरण अभियान की गतिविधियां इस रणनीति की दिशा तय करेंगी।