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MP News: मध्य प्रदेश में 1 जुलाई से बदलने जा रहा पुलिस का चेहरा, 24 हजार टैबलेट खरीदने की तैयारी

देश में अपराधिक कानून को पूरी तरह बदलने के लिए आईपीसी (IPC) की जगह तीन नए कानून बनाए गए हैं जो आने वाली 1 जुलाई 2024 से देशभर में लागू हो जाएंगे। इन नए अपराधिक कानूनों को समझने के लिए पुलिस विभाग के सभी विवेचकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन नए अपराधिक कानूनों की वजह से 1 जुलाई से मध्य प्रदेश पुलिस भी बदली- बदली नजर आएगी।

By Jagran News Edited By: Siddharth Chaurasiya Sat, 15 Jun 2024 05:46 PM (IST)
देश में अपराधिक कानून को पूरी तरह बदलने के लिए आईपीसी (IPC) की जगह तीन नए कानून बनाए गए हैं।

राज्य ब्यूरो, जागरण, भोपाल। देश में अपराधिक कानून को पूरी तरह बदलने के लिए आईपीसी (IPC) की जगह तीन नए कानून बनाए गए हैं, जो आने वाली 1 जुलाई 2024 से देशभर में लागू हो जाएंगे। इन नए अपराधिक कानूनों को समझने के लिए पुलिस विभाग के सभी विवेचकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इन नए अपराधिक कानूनों की वजह से 1 जुलाई से मध्य प्रदेश पुलिस भी बदली- बदली नजर आएगी। इन कानूनों में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि पुलिस का अधिकतर काम डिजिटल होने जा रहा है। साक्ष्य संकलन के लिए हर घटना की वीडियो रिकार्डिंग करनी होगी। यहां तक कि पुलिस आरोपी या शिकायतकर्ता के यहां जाती है तो उसकी भी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसके लिए हर जांच अधिकारी को टैबलेट दिए जाएंगे।

बीते दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी तीन अधिसूचनाओं के अनुसार, नए कानूनों के प्रावधान 1 जुलाई से लागू होंगे। ये कानून औपनिवेशिक युग के भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। तीनों कानूनों को पिछले साल 21 दिसंबर को संसद की मंजूरी मिल गई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी 25 दिसंबर को इन कानून को अपनी सहमति दे दी थी, जिसके बाद 164 साल पुराना अपराधिक कानून बदला गया।

24 हजार टैबलेट की खरीदारी

पुलिस मुख्यालय 24 हजार टैबलेट की खरीदारी करने जा रहा है। अभी आवश्यकता होने पर पुलिसकर्मियों को अपने मोबाइल से वीडियो बनाना पड़ता है, लेकिन कानून में प्रावधान नहीं होने के कारण इस तरह के कई साक्ष्य न्यायालय में मान्य नहीं किए जाते थे। बदलाव के अनुरूप क्राइम और क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) में परिवर्तन किया जा रहा है, जिससे एफआईआर दर्ज करने में कोई दिक्कत नहीं आए।

पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जांच अधिकारी इन कानूनों के बारे में अच्छे से समझ सकें, इसके लिए सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों की पुस्तिका तैयार कर जांच अधिकारियों को दी गई है। सभी जिलों में इसके लिए मुख्य प्रशिक्षकों को चिह्नित कर पुलिस मुख्यालय ने ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद जिला स्तर पर जांच अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्हें बताया जा रहा है कि FIR से लेकर जांच और चालान प्रस्तुत करने तक किन-किन बिंदुओं का ध्यान रखना है।

1 जुलाई से बदल जाएगा अपराधिक कानून

1 जुलाई 2024 से ब्रिटिश काल से लागू भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम निष्प्रभावी हो जाएंगे। उनकी जगह नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए जा रहे हैं।

IPC की 511 धाराओं की जगह बीएनएस में 358 धाराएं होंगी। बीएनएसएस में सीआरपीसी की 177 धाराओं को बदलने के साथ ही 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं। इसमें अब कुल 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 166 की जगह 170 धाराएं होंगी। इसी में साक्ष्य संकलन के नए तरीकों को भी जोड़ा गया है।