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MP में नल-जल योजनाओं की नई व्यवस्था : पंचायतें संभालेंगी संचालन, पानी समिति तय करेगी शुल्क व नियम

By Vaibhav SridharEdited By: Ravindra Soni
Published: Mon, 06 Apr 2026 05:07 PM (IST)

मध्य प्रदेश में ग्रामीण नल-जल योजनाओं का संचालन अब पंचायतें करेंगी। पानी समितियां सहयोग करेंगी, जिनमें 50% महिलाएं होंगी। नए ...और पढ़ें

नल:जल योजना (प्रतीकात्मक चित्र)

नल:जल योजना (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

वैभव श्रीधर, भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति के लिए बनाई गईं नल जल योजनाओं का संचालन पंचायतें करेंगी। इनके सहयोग के लिए पानी समितियां बनाई जाएंगी, जिसके अध्यक्ष सरपंच होंगे। इसमें 50 प्रतिशत महिलाओं को रखना अनिवार्य होगा। पहली बार नए कनेक्शन पर जन सहयोग राशि लेने का प्रविधान किया गया है। यह एक से लेकर दस हजार रुपये होगी। पहले से जिन्हें कनेक्शन दिए जा चुके हैं, उनसे किस्तों में राशि ली जाएगी। मासिक जल कर 60 से 200 रुपये तक होगा। इसे नहीं देने वाले उपभोक्ता पर बकाया राशि के पांच से दस प्रतिशत तक अर्थदंड लगाया जा सकेगा।

पानी समिति को यह अधिकार

पानी समिति को अंत्योदय, विधवा और दिव्यांगजन परिवारों का मासिक शुल्क पांच से 10 प्रतिशत कम करने का अधिकार भी होगा। जल संरक्षण के लिए अपव्यय रोकने अर्थदंड का प्रविधान किया है, यह दो सौ से पांच रुपये तक होगा। लगातार अपव्यय प्रमाणित होने पर कनेक्शन काट दिया जाएगा। योजना के संचालन के लिए मध्य प्रदेश पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम 2026 तैयार कर आपत्ति-सुझाव मांगें हैं।

इसलिए बनाई नई व्यवस्था

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 18 हजार से अधिक योजनाएं बनाई गई हैं। पहले इनका संचालन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा करने की योजना बनाई गई थी और इसके लिए दो हजार करोड़ रुपये से अधिक मांगे गए थे। इस पर वित्त विभाग की आपत्ति थी कि जब विकसित भारत जी राम जी सहित अन्य योजनाओं में राशि का प्रावधान है तो प्रदेश के राजकोष पर भार क्यों डाला जाना चाहिए। कैबिनेट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद योजना के संचालन का जिम्मा पंचायतों को सौंपने का निर्णय लिया। विभाग ने इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत (ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम 2026 बनाए हैं।

पंचायतों का यह रहेगा दायित्व

ग्राम पंचायत नल जल योजना के संचालन, संधारण, रखरखाव, मरम्मत, उन्नयन सुनिश्चित करेगी। समय पर जलापूर्ति, पेयजल के अपव्यय को रोकना, क्षतिग्रस्त, टूटी-फूटी पाइप लाइन, कनेक्शन की मरम्मत, ग्राम के छूटे हुए परिवारों को मांग के अनुसार नए कनेक्शन देना देना भी इसका ही दायित्व होगा। जलकर का निर्धारण, पंपिंग के लिए विद्युत बिलों का प्रतिमाह भुगतान, जल संरक्षण के काम भी पंचायतों की देख-रेख में होंगे। पंप संचालन के लिए वाल्व सह पंप आपरेटर की सेवाएं ली जा सकेंगी। पारिश्रमिक कार्य के आधार पर या उपभोक्ता से वसूले गए जल प्रभार के आधार पर निर्धारित होगा।

पानी समिति करेगी जन सहयोग शुल्क की अनुशंसा

  • पंचायतें, पानी समिति की अनुशंसा पर मासिक जल कर और जल सहयोग शुल्क का निर्धारण करेंगी। प्रत्येक प्रकार के कनेक्शन पर जल सहयोग शुल्क, जो एक बार लिया जाएगा, अलग-अलग होगा।
  • पहले से कनेक्शन लेने वालों से किस्तों में राशि ली जा सकेगी। समिति के प्रस्ताव पर अति गरीब, अंत्योदय परिवार जिनकी आय का कोई साधन न हो ऐसे पांच से 10 परिवार का मासिक जल कर राशि माफ किया जा सकेगा।
  • जल कर संग्रहण में पारदर्शिता रहे, इसके लिए पंचायत दर्पण पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। बकाया वसूली न होने पर उपभोक्ता की पेयजल आपूर्ति स्थगित कर दी जाएगी।
  • दस प्रतिशत तक अर्थदंड लगाया जा सकेगा। तीन माह तक शुल्क जमा ना करने पर कनेक्शन काट दिया जाएगा।
  • पानी का अपव्यय करने पर अर्थदंड न्यूनतम सौ रुपये और दो बार से अधिक पाए जाने पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

प्रस्तावित शुल्क संरचना

कनेक्शन का प्रकार - मासिक जल कर की न्यूनतम दर
घरेलू (परिवार) जनजातीय विकासखंड- 60 रुपये प्रति परिवार।
घरेलू (परिवार) मास्टर प्लान में शामिल पंचायत के लिए-120 प्रति परिवार। 
घरेलू (परिवार) सामान्य पंचायत के लिए- 100 प्रति परिवार।
विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी- 200 प्रतिमाह।
औद्योगिक संस्थान- मात्रा के अनुसार उत्पादन शुल्क आधारित।
गैर-घरेलू (औद्योगिक से भिन्न)- 500 प्रति माह या मात्रा के अनुसार उत्पादन शुल्क आधारित।

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जन सहयोग राशि

अनुसूचित जाति-जनजाति परिवार- 1,000 रुपये।
अन्य परिवार- 2,500 रुपये।
विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी- 5,000 रुपये। 
औद्योगिक संस्थान- 10,000 रुपये। 
गैर-घरेलू (औद्योगिक से भिन्न)- 8,000 रुपये।