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AIIMS भोपाल का ‘स्मार्ट हेलमेट’ करेगा कमाल : पहनते ही मिलेगा दांत व जबड़े का 3D एक्स-रे, AI से होगी सटीक जांच

Published: Mon, 06 Apr 2026 01:53 AM (IST)

AIIMS भोपाल ICMR के 'फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज' के तहत एक स्मार्ट हेलमेट विकसित कर रहा है। यह हेलमेट पहनते ...और पढ़ें

एम्स भवन (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जल्द ही दंत चिकित्सा और जबड़े की जांच के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की तैयारी में है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के ‘फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज’ के तहत यहां एक अत्याधुनिक हेलमेट विकसित किया जा रहा है, जिसे पहनते ही मरीज के दांतों और जबड़े का थ्री-डी एक्स-रे संभव हो सकेगा। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला इनोवेटिव प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सटीक और तेज डायग्नोसिस किया जाएगा।

एआई और न्यूरल नेटवर्क से सटीक जांच

इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व एम्स भोपाल के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर Dr. BL Soni कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस हेलमेट में एडवांस आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और विस्तृत इमेज प्रदान करता है। मरीज को सिर्फ हेलमेट पहनना होगा और कुछ ही समय में जबड़े की आंतरिक संरचना की थ्री-डी रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।

मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में बड़ा बदलाव

यह तकनीक खासतौर पर चेहरे और जबड़े (मैक्सिलोफेशियल) से जुड़ी जटिल चोटों और सर्जरी के मामलों में गेमचेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल जांच प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उपचार अधिक सुरक्षित और सटीक हो सकेगा। जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों को बेहतर विजुअल डेटा मिलेगा, जिससे सफलता दर बढ़ने की उम्मीद है।

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भविष्य की डायग्नोसिस तकनीक तैयार

विशेषज्ञों का मानना है कि सफल परीक्षण के बाद यह हेलमेट आधारित तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में डायग्नोसिस के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल सकती है। एआई आधारित यह इनोवेशन न सिर्फ भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी हेल्थकेयर में नई दिशा तय कर सकता है।

यह हेलमेट आधारित थ्रीडी एक्स-रे डिवाइस आईसीएमआर के फर्स्ट इन वर्ल्ड चैलेंज के तहत विकसित की जा रही है। यह तकनीक न केवल जांच के समय को कम करेगी, बल्कि एआई के उपयोग से डॉक्टरों को जबड़े की गहरी चोटों और बीमारियों की सटीक रिपोर्ट देगी। यह भविष्य में मैक्सिलोफेशियल सर्जरी और डायग्नोसिस का तरीका पूरी तरह बदल देगा।
- डॉ. बाबू लाल सोनी, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, एम्स भोपाल