MP में मनरेगा के 6 हजार करोड़ अटके, निर्माण कार्यों पर असर; नई VB-G RAM-G में अब तक सिर्फ 10 हजार काम मंजूर
मध्य प्रदेश में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों का 6 हजार करोड़ रुपये का भुगतान केंद्र सरकार से अटका ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
मध्य प्रदेश में मनरेगा के 6 हजार करोड़ रुपये लंबित।
निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी, कई जगह काम बंद।
केंद्र से भुगतान के लिए राज्य सरकार का लगातार प्रयास।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में मनरेगा से जुड़े पुराने और वर्तमान निर्माण कार्यों का करीब 6 हजार करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। यह राशि केंद्र सरकार से मिलनी है। करीब तीन महीने पहले मनरेगा के स्थान पर लागू विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी VB-G RAM-G के बावजूद पुरानी योजना के तहत स्वीकृत और चल रहे कार्यों का भुगतान लंबित है।
लंबित राशि में बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के भुगतान का है। राशि नहीं मिलने से कई जगह काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि कुछ कार्यों के बंद होने की भी जानकारी है। सामग्री उपलब्ध कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं और एजेंसियों का भुगतान भी अटका हुआ है।
दिल्ली पहुंची अधिकारियों की टीम
लंबित भुगतान जारी कराने के लिए राज्य सरकार केंद्र से लगातार पत्राचार कर रही है। हाल ही में प्रदेश के अधिकारियों की एक टीम भी दिल्ली जाकर इस मुद्दे पर चर्चा कर चुकी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी जल्द केंद्र सरकार के अधिकारियों से मुलाकात कर लंबित राशि का मुद्दा उठाने वाले हैं।
हालांकि, केंद्र से कुछ राशि मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन एकमुश्त पूरी 6 हजार करोड़ रुपये की राशि जारी होने की संभावना कम मानी जा रही है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने पुराने कार्यों को समय पर पूरा कराने की चुनौती बनी हुई है।
मनरेगा में अभी भी 5.25 लाख से ज्यादा काम जारी
प्रदेश में मनरेगा के तहत फिलहाल सवा पांच लाख से अधिक कार्य चल रहे हैं। इनमें करीब 3.40 लाख कार्य आवास निर्माण से जुड़े हैं। इन परियोजनाओं में मजदूरी के साथ निर्माण सामग्री पर भी खर्च होता है।
सामग्री मद में भुगतान लंबित होने से निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से आवास और अन्य निर्माण कार्यों में सामग्री की आपूर्ति बाधित होने के कारण काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है।
नई योजना में अब तक सिर्फ 10 हजार काम स्वीकृत
मनरेगा के स्थान पर शुरू की गई VB-G RAM-G के तहत प्रदेश में अभी करीब 10 हजार कार्य ही स्वीकृत हुए हैं। दूसरी ओर, मनरेगा के पहले से स्वीकृत कार्यों का भुगतान लंबित है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती बन गया है।
यह भी पढ़ें- भोपाल के स्वर्ण जयंती पार्क में 'पुष्पा' स्टाइल में चंदन की चोरी, नदी के रास्ते हो रही तस्करी
नई योजना में भुगतान और सत्यापन की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सख्त बताई जा रही है। गड़बड़ियां रोकने के लिए श्रमिकों से जुड़े कार्यों के सत्यापन की प्रक्रिया कड़ी की गई है। ई-केवायसी सत्यापन पूरा होने के बाद ही श्रमिकों को भुगतान किया जाएगा।
पुराने काम जल्द पूरा कराने पर जोर
सरकार का लक्ष्य है कि मनरेगा के तहत पहले से चल रहे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि नई योजना के तहत कामकाज को गति दी जा सके। लेकिन करीब 6 हजार करोड़ रुपये के लंबित भुगतान के कारण निर्माण कार्यों की रफ्तार प्रभावित होना राज्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
