भोपाल के स्वर्ण जयंती पार्क में 'पुष्पा' स्टाइल में चंदन की चोरी, नदी के रास्ते हो रही तस्करी
भोपाल के स्वर्ण जयंती पार्क में चंदन चोर गिरोह 'पुष्पा' फिल्म की तर्ज पर चोरी कर रहा है। चोर पेड़ ...और पढ़ें

कलियासोत नदी में पड़ा चंदन की लकड़ी का ठूंठ। (फोटो- जागरण)
HighLights
स्वर्ण जयंती पार्क में 'पुष्पा' फिल्म की तर्ज पर चंदन चोरी।
चोर पेड़ काटकर लकड़ियों को कलियासोत नदी में फेंक रहे।
जिम्मेदार अधिकारियों को चोरी की भनक तक नहीं है।
प्रवीण दीक्षित, भोपाल। शहर के स्वर्ण जयंती पार्क में एक बार फिर सक्रिय हुए चंदन चोर गिरोह ने इस बार चोरी का नया तरीका अपनाया। साउथ की बहुचर्चित फिल्म 'पुष्पा' में जिस तरह नदी के रास्ते से चंदन की तस्करी करते दिखाया गया है, उसी की तर्ज पर एक मामला राजधानी के मध्य व्यस्ततम क्षेत्र में घटित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इसकी भनक तक जिम्मेदारों को नहीं है। अब सवाल एक ही है कि आखिर चंदन चोर गिरोह में 'पुष्पा' की भूमिका में गिरोह का कौन सा सदस्य है?
करीब 100 एकड़ में फैला है स्वर्ण जयंती पार्क
बावड़ियाकलां से कोलार रोड के सर्वधर्म ब्रिज तक करीब 100 एकड़ क्षेत्र में स्वर्ण जयंती पार्क फैला हुआ है। पार्क के एक ओर कलियासोत नदी का किनारा तो है जबकि तीन तरफ मुख्य सड़कें हैं। हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह पार्क शहर के बीचोंबीच घने जंगल का एहसास कराता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग सुबह-शाम यहां घूमने आते हैं।

'पुष्पा' स्टाइल में चंदन की चोरी
पार्क के घने जंगल में विभिन्न प्रकार के वृक्षों के मध्य ही बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ भी लगे हैं। जिनकी चोरी करने का तरीका भी देखने में फिल्म 'पुष्पा' के जैसा ही है। जंगल से चंदन के पेड़ काटकर उनके छोटे-छोटे टुकड़े करना और फिर नदी की ओर फेंक देना। नीचे पार्क से नीचे उतर कर उन चंदन की लकड़ियों को अपने ठिकाने तक ले जाते है।

पार्क के तीनों ओर पाकी जालीदार बाउंड्री है और कलियासोत नदी की ओर से किसी भी तरह की फेंसिंग व बाउंड्री नहीं होने से तस्करों के लिए आने जाने का यही एक रस्ता है, जहां से वो आना-जाना कर सकते है। नदी के एक ओर जंगल तो दूसरी ओर सर्वधर्म कॉलोनी की इमारते बनी हुई है।
नदी में आकर मिलता है नाला
स्वर्ण जयंती पार्क के स्टॉप डेम के पास,पार्क के मध्य से शाहपुरा तालाब से आ रहा नाला कलियासोत नदी में मिलता है, उसी क्षेत्र से पार्क के जंगल से काटे गए चंदन के पेड़ की लकड़ियां नदी में फेंकी जाती हैं और बाद में नीचे आकर चोर नदी के रस्ते ही ले जाते हैं। जिसकी भनक तक सुरक्षा में तैनात जिम्मेदारों को नहीं है।

वेतन मजदूर का, काम चौकीदारी
पार्क के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छपने के पर बताया कि पार्क में नियमित चार कर्मचारी दो दिन में दो रात में तैनात किए गए हैं। इनके अलावा पांच कर्मचारी मजदूर के नाम पर रखे गए, जिनमे से दो रात में और तीन से दिन में चौकीदारी करते है। जिनको नियमित रूप से हर माह वेतन भी नहीं मिलता। क्या 100 एकड़ में फैले पार्क के घने जंगल की सुरक्षा के लिए इतने कर्मचारी पर्याप्त है।
एक बार पहले भी चंदन की चोरी का मामला आने पर संज्ञान लिया गया था। फिर से यदि चंदन के पेड़ की कटाई-चोरी हो रही है तो इसको दिखवाते हैं और इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेश माचरा, डीएफओ, पर्यावरण वानिकी
