तस्वीर गधे की, डिग्री नर्सिंग स्नातक की... MP में नर्सेस काउंसिल का गजब कारनामा; बगैर सत्यापन जारी कर दिया डिजिटल सर्टिफिकेट
मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की खामियों को उजागर करते हुए एक गधे को नर्स के ...और पढ़ें

गधे के नाम पर जारी डिजिटल प्रमाण पत्र। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
गधे की तस्वीर पर जारी हुआ नर्स पंजीकरण प्रमाणपत्र।
ऑनलाइन सिस्टम की खामियां उजागर करने को किया आवेदन।
काउंसिल ने पंजीकरण रोका, धोखाधड़ी की जांच शुरू की।
मुकेश विश्वकर्मा, भोपाल। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था इंसान और जानवर में फर्क नहीं करती। यहां तक कि किसी गधे को भी नर्स बना सकती है। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। गधे की एक तस्वीर, कुछ ब्यौरे और दो असंबद्ध दस्तावेजों की स्कैन कापी के आधार पर मप्र नर्सेस काउंसिल ने 'डंकी एमपीएनआरसी' के नाम पर बाकायदा डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी कर दिया। काउंसिल अब मामले की जांच और एफआईआर की बात कह रहा है।
गधे की फोटो लगाई, पता लिखा- ‘जहां जगह मिल जाए’
दरअसल, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने नर्सेस काउंसिल के ऑनलाइन सिस्टम से डंकी एमपीएनआरसी पिता डंकी फादर के नाम से पंजीयन के लिए आवेदन किया। आवेदन में गधे की तस्वीर लगाई गई, धर्म के खाते में अन्य, जाति में जानवर और पते के खाने में लिखा गया-जहां पर जगह मिल जाए।
शुल्क भुगतान के बाद प्रमाण पत्र जारी
शैक्षणिक दस्तावेजों के स्थान पर ऐसे कागजात अपलोड किए गए, जिनसे वास्तविक शैक्षणिक योग्यता प्रमाणित नहीं होती। पंजीयन के लिए निर्धारित 2050 रुपये का शुल्क भुगतान करने के बाद डिजिटल पंजीयन प्रमाणपत्र जारी हो गया। जिसमें डंकी एमपीएनआरसी को भोपाल नर्सिंग कॉलेज से बीएससी नर्सिंग पासआउट प्रमाणित कर नर्स-मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत बता दिया गया। यह पंजीयन सितंबर 2031 तक के लिए वैध है।
दस्तावेज सत्यापन पर उठे गंभीर सवाल
रवि परमार ने बताया कि उन्होंने यह परीक्षण परिषद की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन और सिस्टम की कार्यप्रणाली की गड़बड़ी सामने लाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि जब गधे का रजिस्ट्रेशन हो सकता है तो असली दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हो रहा है? उनका कहना है कि यदि आधिकारिक पोर्टल पर इस तरह आवेदन स्वीकार कर प्रमाणपत्र जारी हो सकता है तो यह केवल तकनीकी खामी का मामला नहीं है, बल्कि पंजीयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है।
यदि कोई व्यक्ति बिना वास्तविक नर्सिंग योग्यता के पंजीयन प्राप्त कर लेता है और बाद में इसी प्रमाणपत्र के आधार पर अस्पताल, नर्सिंग होम या अन्य स्वास्थ्य संस्थान में नौकरी हासिल करता है तो मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
दो दस्तावेज मांगे थे, उसकी सत्यता नहीं जांची
पंजीयन की पुरानी प्रक्रिया में आवेदन के साथ 10वीं, 12वीं परीक्षा की अंकसूची, बीएससी नर्सिंग कोर्स कंप्लीशन प्रमाणपत्र, प्रोविजनल डिग्री या डिप्लोमा के सभी सत्र की मार्कशीट का कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सील साइन के साथ सत्यापन मांगा जाता था। काउंसिल में इनकी जांच होती, उसके बाद डिजिटल साइन के साथ दस्तावेज जारी होते।
अब पंजीयन के लिए केवल ट्रेनिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट की स्कैन कापी मांगी जा रही है। वह दस्तावेज भी संबद्ध है या कोई और दस्तावेज लगा दिया गया है, यह जांचने की कोई व्यवस्था सिस्टम में नहीं है।
नया पंजीयन रोका गया
इस खुलासे के बाद काउंसिल ने अपने पोर्टल पर पंजीयन का लिंक हटा लिया है। यानी कुछ दिनों के लिए ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया रोक दी गई है। काउंसिल का कहना है कि पंजीयन प्रक्रिया में आवश्यक सेफगार्ड लगाने के बाद जल्दी ही इसे फिर से शुरू किया जाएगा।
यह फ्रॉड किया गया है। आईटी सेल से कहा गया है कि वेबसाइट में और सेफगार्ड लगाए जाएं। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की जा रही है। वेबसाइट विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।
- डा. बीनू कुशवाहा, अध्यक्ष, मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल
