MP पर कर्ज का बोझ बढ़ा: सरकार ने फिर लिया 1,500 करोड़ का ऋण, अप्रैल से अब तक 54 हजार करोड़ की नई उधारी
मध्य प्रदेश सरकार ने विभिन्न विकास कार्यों के लिए बाजार से फिर 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इसके ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (फाइल फोटो)
HighLights
सरकार ने विकास कार्यों के लिए 1500 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया।
इस वित्त वर्ष के पांच माह में प्रदेश का कर्ज 54 हजार करोड़ रुपये बढ़ा।
कांग्रेस ने सरकार से की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को फिर बाजार से 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए दो किस्तों में यह कर्ज लिया गया। पहला कर्ज 18 वर्ष की अवधि के लिए 800 करोड़ का है, जिसका भुगतान जुलाई 2044 में किया जाएगा। वहीं, दूसरा कर्ज 30 वर्ष की अवधि के लिए 700 करोड़ का है, जिसे सितंबर 2056 तक चुकाना है।
पांच महीने में कर्ज में 54 हजार करोड़ की बढ़ोतरी
यहां पर यह बता दें कि प्रदेश सरकार अप्रैल 2026 से अब तक 54 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। सितंबर में ही ढाई हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया। इसे मिलाकर प्रदेश पर अब कुल पांच लाख 42 हजार 614 रुपये कर्ज हो गया है। पिछले वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2026 तक मप्र पर कुल कर्ज चार लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपये था।
कांग्रेस बोली- कर्ज की राशि कहां खर्च हो रही?
उधर, प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने सरकार से आर्थिक स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव को लिखे पत्र में कहा कि प्रदेश में किसानों को उपज का मूल्य नहीं मिल रहा, युवा बेरोजगार हैं, स्कूलों और अस्पतालों में संसाधनों की कमी बनी हुई है, तो फिर कर्ज किस काम के लिए लिया जा रहा है।
श्वेत पत्र जारी करने की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार श्वेतपत्र जारी कर बताए कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक बाजार से कितना नया कर्ज लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि उधार ली गई राशि में से कितनी पूंजीगत विकास कार्यों पर खर्च हुई और कितनी रकम पुराने कर्ज तथा उसके ब्याज के भुगतान में लगाई गई।
