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MP में वन अतिक्रमणकारियों व खनन माफिया पर शिकंजे की तैयारी, पुलिस के साथ ट्रेनिंग लेंगे वनरक्षक; हमलों से निपटने की मिलेगी ट्रेनिंग

Published: Thu, 15 Oct 2026 06:04 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार वन भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने के लिए वन अमले को मजबूत कर रही है। वनरक्षकों ...और पढ़ें

पुलिस परेड (प्रतीकात्मक चित्र)

पुलिस परेड (प्रतीकात्मक चित्र)

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा और वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने वन अमले को मजबूत बनाने की तैयारी की है। अब वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को पुलिस के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य अतिक्रमणकारियों, शिकारियों, लकड़ी चोरों और अवैध खनन व रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है।

वनरक्षकों को आत्मरक्षा और दंगा नियंत्रण की ट्रेनिंग

प्रस्तावित प्रशिक्षण में वन विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ, विशेषकर वनरक्षक और डिप्टी रेंजर को शामिल किया जाएगा। पुलिस के साथ प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आत्मरक्षा, दंगा नियंत्रण और विरोध या हिंसक हमलों जैसी परिस्थितियों से निपटने के तरीके सिखाए जाएंगे। इससे वन भूमि से अतिक्रमण हटाने, अवैध उत्खनन रोकने और शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दरअसल, प्रदेश के कई जिलों में वन विभाग की टीमों को कार्रवाई के दौरान हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा है। सागर, खंडवा, ग्वालियर और श्योपुर में अतिक्रमण हटाने तथा अवैध उत्खनन रोकने पहुंची टीमों पर पथराव और जानलेवा हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में वन अमले को पुलिस की तर्ज पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

वन भूमि पर अतिक्रमण बड़ी चुनौती

मध्य प्रदेश में वन भूमि पर अवैध कब्जे और जंगलों में सक्रिय शिकारी गिरोह वन विभाग के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। वन भूमि पर कब्जा कर खेती करने की कोशिशें भी इस समस्या को गंभीर बना रही हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रदेश में 7,02,167 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया था। यह क्षेत्रफल करीब 17.35 लाख एकड़ के बराबर है। इतने बड़े भूभाग पर अतिक्रमण का आंकड़ा वन भूमि की सुरक्षा के सामने खड़ी चुनौती को उजागर करता है।

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सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बेहतर सुरक्षा और परिस्थितियों से निपटने का कौशल मिल सकेगा।

पुलिस के साथ प्रशिक्षण दिलवाने से वन अमले को अतिक्रमणकारियों व खनन माफिया से निपटने योग्य और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
-अमित दुबे, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश