MP में छोटे किसानों को बड़ा फायदा : सहकारी समितियों से जुड़कर मिलेगा ब्याज-मुक्त ऋण व लाभांश, मात्र 600 रुपये में मिलेगी सदस्यता
केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप, मध्य प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत किया जा रहा है। 14 अप्रैल से ...और पढ़ें

किसानों को सहकारिता से जोड़ने की मुहिम (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
10 लाख नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य।
मात्र 600 रुपये में मिलेगी सहकारी सदस्यता।
ब्याज-मुक्त ऋण, खाद-बीज और लाभांश का लाभ।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश में अब गांव-गांव तक सहकारी समितियों का विस्तार करते हुए करीब 10 लाख नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 14 अप्रैल (आंबेडकर जयंती) से 15 मई तक विशेष सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के तहत किसानों से मात्र 600 रुपये शेयर कैपिटल लेकर उन्हें सहकारी समितियों का सदस्य बनाया जाएगा। खास बात यह है कि हर शिविर के आयोजन पर नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) की ओर से 1000 रुपये की सहायता भी दी जाएगी।
प्रदेश में फिलहाल करीब 60 लाख किसान सहकारी समितियों से जुड़े हैं। वहीं, लगभग 10 लाख पात्र किसान अभी भी सदस्यता से वंचित हैं, जिन्हें इस अभियान के जरिए जोड़ने पर फोकस किया जा रहा है।
पैक्स नेटवर्क होगा और मजबूत
मध्य प्रदेश में इस समय करीब 4500 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां (PACS) सक्रिय हैं, जिनसे 68 लाख किसान जुड़े हुए हैं। अब इन समितियों के नेटवर्क को और विस्तार देने के लिए 600 नई समितियों के गठन की प्रक्रिया भी जारी है।
इन किसानों को मिलेगी प्राथमिकता
अभियान में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान,
सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद किसान सहकारिता व्यवस्था से लाभ उठा सकें।
मिलेंगी ये सुविधाएं
सहकारी समिति से जुड़ने वाले किसानों को:
- जमीन के आधार पर साख सीमा तय कर बिना ब्याज अल्पकालीन ऋण मुहैया कराया जाएगा।
- इसके अलावा खाद, बीज और कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
- सहकारी संस्था के मुनाफे में लाभांश का हिस्सा भी मिलेगा।
अधिकारियों के मुताबिक, सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह अभियान बेहद अहम है। नई समितियों के गठन के साथ-साथ पात्र किसानों को जोड़कर प्रदेश में सहकारिता की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ाए जाएंगे।
