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ट्रेन में बोगी गायब... कंफर्म AC टिकट के बावजूद बुजुर्ग यात्रियों को जनरल कोच में करना पड़ा सफर, रेलवे पर लगा जुर्माना

Published: Mon, 13 Apr 2026 08:22 PM (IST)

भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। चार बुजुर्ग यात्रियों को कंफर्म एसी टिकट ...और पढ़ें

सेवा में कमी पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया रेलवे पर जुर्माना। (प्रतीकात्मक चित्र)

सेवा में कमी पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया रेलवे पर जुर्माना। (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। एक यात्री के पास एसी कोच का कंफर्म टिकट होने के बाद भी उसे जनरल कोच में शौचालय के पास बैठकर सफर करना पड़ा। इसका कारण यह रहा कि रेलवे अतिरिक्त कोच लगाना भूल गया। भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग बेंच-2 ने रेलवे की लापरवाही को गंभीर मानते हुए निर्णय सुनाया है।

आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह, अंजुम फिरोज व प्रीति मुद्गल की बेंच ने रेलवे द्वारा यात्री को आरक्षित सीट का कोच ट्रेन में न लगाने और शिकायत करने के बावजूद भी सीट मुहैया न कराने को यात्री के प्रति सेवा में कमी माना। यात्रियों को हुई असुविधा के लिए रेलवे को 15 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया।

कोच ही नहीं लगा, ठंड में हुई परेशानी

दरअसल, साकेत नगर निवासी मंगलेश कुमार जोशी ने पश्चिम मध्य रेलवे रानी कमलापति के मंडल रेल प्रबंधक के खिलाफ 10 दिसंबर 2024 में उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। मंगलेश कुमार जोशी ने शिकायत में लिखा है कि उन्होंने 30 नवंबर 2024 को नागपुर से भोपाल के लिए चार वरिष्ठ नागरिकों की अमृतसर एक्सप्रेस (22125) में डीएल-1 कोच की कंफर्म सीटें बुक कराई थीं। टिकट पर सीट नंबर भी आवंटित थे, लेकिन जब ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची तो संबंधित कोच ही मौजूद नहीं था।

टीटीई बोला- जनरल में बैठो

टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) ने चारों यात्रियों को जनरल कोच में सफर करने के लिए कहा। मजबूरी में यात्रियों को जनरल डिब्बे में चढ़ना पड़ा, जहां उन्हें सीट तक नहीं मिली। उन्हें शौचालय के पास बैठकर यात्रा करनी पड़ी। ठंड के मौसम और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे अस्थमा बीमारी के कारण उन्हें और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

शिकायत के बावजूद नहीं मिली मदद

यात्रा के दौरान मंगलेश कुमार जोशी ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन रेलवे की ओर से कोई ठोस सहायता नहीं मिली। केवल सीट नंबर की जानकारी दी गई, जबकि कोच की स्थिति को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। पूरे सफर में टीटीई या अन्य कर्मचारियों ने भी कोई सहयोग नहीं किया।

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रेलवे सबूत पेश नहीं कर पाया

उपभोक्ता पक्ष के अधिवक्ता संदीप गुरु ने कहा कि रेलवे ने तर्क रखा कि संबंधित कोच ट्रेन में लगाया गया था और यात्रियों को सीटें आवंटित थीं, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इसे सेवा में कमी माना। आयोग ने कहा कि यात्रियों को कंफर्म टिकट के बावजूद ऐसी स्थिति में यात्रा करने के लिए मजबूर करना अनुचित है। इसी आधार पर रेलवे को हर्जाना देने का आदेश दिया गया।