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एक क्लिक, एक पता, एक पहचान... और चुटकियों में बांग्लादेशी नागरिक बन जाते थे 'भारतीय', MP से असम तक फैला गोरखधंधा

Published: Fri, 11 Sep 2026 03:42 PM (IST)

एसटीएफ ने मध्य प्रदेश से असम तक फैले एक बड़े फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा किया है, जहाँ बांग्लादेशी नागरिकों ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. एसटीएफ ने मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़ किया।

  2. बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाकर विदेश भेजा जा रहा था।

  3. एक ही पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी, सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। किसी एक पते से 30, तो किसी एक पते से 40 पासपोर्ट, आखिर यह कैसे संभव हुआ कि सालों तक किसी को शक तक नहीं हुआ? मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा और भोपाल से शुरू हुई फर्जी पासपोर्ट की जांच अब सीधे तौर पर पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया की खामियों की ओर इशारा कर रही है। एसटीएफ की जांच बताती है कि यह मामला महज कुछ फर्जी दस्तावेजों का नहीं, बल्कि भारत में बांग्लादेशी नागरिकों को नागरिकता दिलाने के षड्यंत्र से जुड़ा है। इस नेटवर्क ने वर्षों तक पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी।

एसटीएफ के अनुसार, गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद व्यवस्थित थी। सबसे पहले बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आ चुके लोगों की पहचान की जाती थी। इसके बाद उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज गढ़े जाते थे, ताकि एक भारतीय पहचान खड़ी की जा सके। इन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाकर पासपोर्ट कार्यालयों में आवेदन डाले जाते थे और हैरानी की बात यह कि आवेदन स्वीकार भी होते रहे।

ग्वालियर से भोपाल तक फैला जाल

जांच में सबसे पहले ग्वालियर जिले के डबरा स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी सामने आई, जहां एक ही पते पर 30 पासपोर्ट जारी हुए पाए गए। इसके बाद भोपाल के गोविंदपुरा इलाके के अन्ना नगर मठ का पता जांच में जुड़ा, जहां से 40 और पासपोर्ट जारी हुए। यानी सिर्फ दो पतों से 70 से ज्यादा पासपोर्ट। ये सभी पासपोर्ट 2021 से 2023 के बीच बनवाए गए थे।

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धार्मिक पहचान का इस्तेमाल ढाल की तरह

इस नेटवर्क की सबसे चौंकाने वाली परत यह रही कि फर्जी पासपोर्ट धारक खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जैसे देशों की यात्रा करते रहे। जांचकर्ताओं का मानना है कि धार्मिक यात्रा की आड़ लेने से शक की गुंजाइश और भी कम हो जाती थी।

असम कनेक्शन: कई राज्यों में फैला नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि गिरोह का मास्टरमाइंड असम में बैठकर पूरा खेल संचालित कर रहा था। वह उन लोगों के सीधे संपर्क में था, जो वर्षों पहले बांग्लादेश से भारत आकर असम, कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों में बस गए थे। मामले की तह तक जाने के लिए एसटीएफ की पांच सदस्यीय टीम असम रवाना की गई है, जो नेटवर्क के अन्य सदस्यों, दस्तावेज बनाने वालों और विदेश यात्राओं के कनेक्शन की जानकारी जुटाएगी। एसटीएफ के एक अधिकारी के मुताबिक अब तक गिरोह के चार आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पूछताछ में नेटवर्क के अन्य सदस्यों और दस्तावेज तैयार करने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है।