चार फर्म बनाईं, आपस में ही बोली लगाकर 3,754 का UPS 11,247 रुपये में खरीदा; MP में कंप्यूटर खरीदी में करोड़ों का घोटाला
मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग में 10.99 करोड़ रुपये के कंप्यूटर खरीद घोटाले पर EOW ने FIR दर्ज की ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
EOW ने ₹10.99 करोड़ के कंप्यूटर खरीद घोटाले में FIR दर्ज की।
चार फर्मों ने मिलकर फर्जी प्रतिस्पर्धा से टेंडर हासिल किए।
₹3,754 का UPS ₹11,247 में खरीदा, पुराने कंप्यूटर नए बताए।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में वर्ष 2024 में हुई करीब 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस खरीद अब जांच के घेरे में आ गई है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मामले में एफआईआर दर्ज कर टेंडर प्रक्रिया और उपकरणों की आपूर्ति में कथित गड़बड़ियों की परतें खोल दी हैं।
EOW की जांच में सामने आया कि टेंडर में अलग-अलग और प्रतिस्पर्धी बोलीदाता के रूप में दिखाई देने वाली चार फर्मों के बीच आपसी संबंध थे। जांच एजेंसी के मुताबिक इन फर्मों के जरिए वास्तविक प्रतिस्पर्धा के बजाय टेंडर में फर्जी प्रतिस्पर्धा दिखाकर काम हासिल करने की कोशिश की गई।
जांच में पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर आपूर्ति करने, निर्धारित ब्रांड की जगह लोकल कंपनी की एसएसडी लगाने और यूपीएस की कीमत बाजार दर से कई गुना अधिक वसूलने जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
₹3,754 का UPS विभाग ने खरीदा ₹11,247 में
यूपीएस खरीद में भी बड़ा अंतर सामने आया है। जिस यूपीएस की सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर कीमत करीब 3,754 रुपये थी, उसके लिए विभाग ने 11,247 रुपये प्रति नग का भुगतान किया। वहीं यूपीएस के डिब्बे पर इसकी कीमत 6,086 रुपये अंकित थी।
मामले की जांच के दौरान निर्माता कंपनी साइबर पावर ने ईओडब्ल्यू को बताया कि दस्तावेजों में दर्ज UT1200E मॉडल की आपूर्ति कंपनी ने इस टेंडर में की ही नहीं थी। इससे उपकरणों की वास्तविक खरीद और आपूर्ति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
टेंडर से दो महीने पहले ही 'इंस्टॉल' हो गए कंप्यूटर
सबसे चौंकाने वाली गड़बड़ी कंप्यूटरों की खरीद में सामने आई। विभाग को उपलब्ध कराए गए कंप्यूटरों के वारंटी रिकॉर्ड में इंस्टालेशन की तारीख 22 जुलाई 2024 दर्ज है। जबकि विभाग ने इन कंप्यूटरों की खरीद के लिए टेंडर 23 सितंबर 2024 को जारी किया था।
यानी रिकॉर्ड के मुताबिक जिन कंप्यूटरों की खरीद के लिए टेंडर सितंबर में जारी हुआ, वे जुलाई में ही इंस्टॉल हो चुके थे। इस विसंगति ने पूरी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में दो लोगों ने ईओडब्ल्यू से शिकायत की थी। जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने रणधीर कुमार पटेल (मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम), हेमलता पटेल (मेसर्स शांति ट्रेडर्स), अशोक कुमार सिंह (मेसर्स एचटीएम इंडिया) और देवेंद्र सिंह (मेसर्स सूरज इंटरप्राइजेज) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
ऐसे सामने आया चारों फर्मों का कनेक्शन
EOW की जांच में चारों फर्मों के बीच कथित कारोबारी संबंधों के कई संकेत मिले। GST रिकॉर्ड में शांति ट्रेडर्स और साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का मोबाइल नंबर एक ही पाया गया।
इसी तरह एचटीएम इंडिया की ई-मेल आईडी भी साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के नाम से जुड़ी मिली। जांच एजेंसी के अनुसार एचटीएम इंडिया ने जीएसटी में भोपाल स्थित अपने अतिरिक्त कार्यालय के लिए जो पता दर्ज कराया था, वही पता साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से भी जुड़ा पाया गया।
कई GeM टेंडरों में साथ-साथ बोली लगाने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि चारों फर्में केवल सामाजिक न्याय विभाग के इसी टेंडर में ही एक साथ नहीं दिखीं, बल्कि GeM के कई अन्य टेंडरों में भी साथ-साथ बोली लगाती रही थीं।
ईओडब्ल्यू के मुताबिक कई टेंडरों में इन फर्मों की बोली दरों में काफी कम अंतर रहा। अलग-अलग मौकों पर इन्हीं फर्मों में से किसी एक को काम मिलता रहा। जांच एजेंसी अब इसे टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से कृत्रिम प्रतिस्पर्धा खड़ी करने के एंगल से देख रही है।
कंप्यूटरों की जांच में भी मिलीं अनियमितताएं
खरीद के बाद सामाजिक न्याय विभाग की कमेटी ने कंप्यूटरों की तकनीकी जांच भी की थी। इसमें कुछ कंप्यूटरों में टेंडर की शर्तों के विपरीत RAM और स्टोरेज डिवाइस पाए गए।
कमेटी के अनुसार एसर कंपनी के कंप्यूटरों में निर्धारित ब्रांड की एसएसडी के स्थान पर लोकल कंपनी की एसएसडी लगी मिली। इन अनियमितताओं के आधार पर कमेटी ने मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की थी।
अब ईओडब्ल्यू की एफआईआर के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। एजेंसी टेंडर प्रक्रिया, फर्मों के आपसी संबंध, उपकरणों की वास्तविक खरीद-आपूर्ति और सरकारी भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
