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MP में ढाई साल से अटके साइबर थाने, हेल्पलाइन कॉल सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी लंबित; केंद्र ने जल्द शुरू करने को कहा

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:59 PM (IST)

मध्य प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को जरूरी संसाधनों का इंतजार है। जिलों में साइबर थाने, ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. ढाई साल से लंबित हैं साइबर थाने और हेल्प डेस्क प्रस्ताव।

  2. 50 करोड़ का हेल्पलाइन कॉल सेंटर प्रस्ताव भी अटका।

  3. केंद्र और राज्य ने लंबित प्रस्तावों पर कार्रवाई का दिया जोर।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में साइबर अपराध तेजी से चुनौती बन रहे हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए पुलिस को जरूरी संसाधनों का इंतजार है। साइबर ठगी के मामलों की जांच, तकनीकी साक्ष्य जुटाने और पीड़ितों की रकम तत्काल होल्ड कराने की व्यवस्था मजबूत करने से जुड़े कई प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित हैं।

प्रदेश के सभी जिलों में साइबर थाने खोलने और हर पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित करने की योजना करीब ढाई साल से अटकी है। वहीं, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के लिए राज्यस्तरीय कॉल सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ पाया है।

50 करोड़ की लागत से बनना है कॉल सेंटर

साइबर अपराध की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई के लिए प्रदेश में 50 सीटों वाला कॉल सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, लगभग एक साल से इसका प्रस्ताव शासन के पास लंबित है।

इस कॉल सेंटर के शुरू होने से साइबर ठगी की शिकायतों पर समन्वित कार्रवाई, पीड़ितों की मदद और ठगी गई रकम को समय रहते होल्ड कराने की प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, प्रस्ताव को मंजूरी और बजट आवंटन का इंतजार है।

केंद्र ने भी संसाधन बढ़ाने पर दिया जोर

गत 3 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस के संसाधन बढ़ाने और विशेष रूप से प्रस्तावित कॉल सेंटर को शुरू करने पर जोर दिया गया।

केंद्रीय अधिकारियों ने लंबित प्रस्तावों पर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्य के अधिकारियों से प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तावों को स्वीकृति देने और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार से सहयोग लेने को कहा।

2025 में 634 करोड़ की साइबर ठगी 

साइबर अपराध की चुनौती का अंदाजा प्रदेश में वर्ष 2025 के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान मध्य प्रदेश में करीब 634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। इनमें से 137 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा सके।

ठगी की रकम होल्ड कराने के मामले में मध्य प्रदेश देश में छठवें स्थान पर रहा। वर्ष 2024 में प्रदेश की रैंकिंग 22वें स्थान पर थी। यानी रकम होल्ड कराने के मामले में राज्य की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन ठगी की बड़ी रकम अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।

हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क की योजना

साइबर अपराधों की जांच को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में साइबर थाने खोलने और प्रत्येक पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि, बजट की उपलब्धता नहीं होने से इन योजनाओं को अब तक गति नहीं मिल पाई है।

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है। शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद बैंक खातों और लेनदेन से जुड़ी जानकारी पर कार्रवाई होने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों, तकनीकी सुविधाओं और प्रभावी शिकायत तंत्र की जरूरत और बढ़ जाती है।

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साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए ये प्रस्ताव लंबित

  • - प्रदेश में एकमात्र साइबर थाना भोपाल में है। प्रत्येक जिले में एक थाना खोलने और सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव ढाई वर्ष से लंबित है।
  • - राज्य स्तर पर डिजिटल फोरेंसिक लैब का उन्नयन किया जाना है। इसमें करीब 250 कर्मचारी होंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय लैब का उन्नयन भी अटका हुआ है।
  • - ठगी की राशि होल्ड कराने के लिए मिटिगेशन सेंटर बनाया जाना है।
  • - 27 कंसल्टेंटों की नियुक्ति की जानी है, जो तकनीकी सलाह देंगे।

कॉल सेंटर और मिटिगेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इनके शुरू होने से काम में और आसानी हो जाएगी। राशि होल्ड कराने में मदद मिलेगी। राशि होल्ड कराने में मध्य प्रदेश वर्ष 2025 में छठवें स्थान पर रहा है।
-प्रणय नागवंशी, एसपी-साइबर