मृतकों के नाम पर इलाज, ICU में भर्ती के दावे भी जांच में; MP में आयुष्मान योजना से जुड़े 71 अस्पताल रडार पर, 12 करोड़ के क्लेम संदिग्ध
मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत 71 अस्पतालों के लगभग 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम की जांच ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
आयुष्मान भारत के 12 करोड़ के संदिग्ध क्लेम की जांच।
मध्य प्रदेश के 71 अस्पताल जांच के दायरे में शामिल।
मृतकों के नाम पर इलाज, ICU भर्ती की अनियमितता।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों की ओर से किए गए करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम की जांच शुरू की गई है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस) के डेस्कटॉप ऑडिट में सामने आए संकेतों के आधार पर प्रदेश के 71 अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया है। शुरुआती जांच में मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज दर्ज करने और बिना चिकित्सकीय जरूरत मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाने जैसी संभावित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
भोपाल से इंदौर तक 71 अस्पतालों के क्लेम की जांच
जांच के दायरे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सागर, सतना, नीमच, शाजापुर और टीकमगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य एजेंसी टीएमएस के जरिए अस्पतालों द्वारा दर्ज किए गए क्लेम की निगरानी करती है।
अस्पताल में मरीज के इलाज के बाद योजना के तहत भुगतान के लिए क्लेम प्रस्तुत किया जाता है। सिस्टम में दर्ज जानकारी की जांच के दौरान यदि किसी तरह की असामान्य गतिविधि या विसंगति मिलती है, तो उसे चिह्नित कर आगे की पड़ताल की जाती है। इसी प्रक्रिया में 71 अस्पतालों के क्लेम संदिग्ध पाए गए हैं।
हालांकि, जांच पूरी होने और अनियमितताओं की पुष्टि होने से पहले संबंधित अस्पतालों को दोषी नहीं माना जा सकता।
मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज और ICU में भर्ती दिखाने की आशंका
डेस्कटॉप ऑडिट के दौरान जिन संभावित गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं, उनमें मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज दर्ज करना और बिना चिकित्सकीय आवश्यकता मरीज को आईसीयू में भर्ती दिखाना शामिल है। इसके अलावा इलाज से संबंधित विवरण और क्लेम में दर्ज जानकारी के बीच विसंगतियां भी जांच का आधार बन सकती हैं।
इन मामलों की पड़ताल के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्लेम वास्तविक उपचार के आधार पर किए गए थे या उनमें किसी तरह की अनियमितता हुई है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पहले भी अस्पतालों पर लग चुका है जुर्माना
आयुष्मान भारत योजना के तहत क्लेम और उपचार में अनियमितताओं को लेकर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी पहले भी कार्रवाई कर चुकी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के 25 अस्पतालों पर 2.11 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी। वहीं, 50 अस्पतालों पर कुल 3.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ 18 अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट और 15 को निलंबित भी किया गया था।
अब 71 अस्पतालों के करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम की जांच से एक बार फिर योजना के तहत उपचार की गुणवत्ता, अस्पतालों की जवाबदेही और सरकारी भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
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टीएमएस सॉफ्टवेयर कैसे पकड़ता है गड़बड़ी?
टीएमएस यानी ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम में मरीज के पंजीयन से लेकर अस्पताल में भर्ती, उपचार, डिस्चार्ज और भुगतान के लिए किए गए क्लेम तक की जानकारी दर्ज होती है।
डेस्कटॉप ऑडिट के दौरान इस डेटा और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाता है। यदि किसी मरीज के नाम पर संदिग्ध उपचार दर्ज हो, आईसीयू में भर्ती की जरूरत पर सवाल उठें या इलाज के विवरण में विसंगति मिले, तो ऐसे क्लेम को जांच के लिए चिह्नित किया जा सकता है।
अब जांच के नतीजों पर नजर : स्वास्थ्य एजेंसी की पड़ताल में यह स्पष्ट होगा कि संदिग्ध क्लेम में कितनी राशि के मामले वास्तविक अनियमितताओं से जुड़े हैं और संबंधित अस्पतालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
टीएमएस ने 71 अस्पतालों को संदिग्ध श्रेणी में चिह्नित किया है। अस्पताल में क्लेम दर्ज होने के बाद पोर्टल पर उसकी ट्रैकिंग होती है। गड़बड़ी की आशंका होने पर सॉफ्टवेयर अलर्ट देता है। प्रत्येक 100 क्लेम में चार संदिग्ध मामले मिलना सामान्य सीमा में माना जाता है, लेकिन अलर्ट की संख्या बढ़ने पर जांच की जाती है। इन्हीं संकेतों के आधार पर संबंधित अस्पतालों की जांच चल रही है।
- अरविंद कुमार शाह, सीईओ, आयुष्मान भारत निरामयम
