विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

MP में कोचिंग सेंटरों पर लगाम: हर 3 साल में रिन्यू कराना होगा पंजीयन, फीस से लेकर शिक्षकों की जानकारी वेबसाइट पर देना अनिवार्य

Published: Sun, 25 Oct 2026 03:13 PM (IST)

मध्य प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत हर तीन साल में पंजीयन ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. पंजीयन हर तीन साल में नवीनीकृत कराना अनिवार्य होगा।

  2. फीस, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की योग्यता वेबसाइट पर सार्वजनिक।

  3. विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 जारी कर दिए हैं। अब कोचिंग संस्थान अनिश्चितकाल तक एक ही पंजीयन के आधार पर संचालन नहीं कर सकेंगे। उन्हें हर तीन साल में पंजीयन का नवीनीकरण कराना होगा। नए प्रावधानों के तहत फीस की पारदर्शिता, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायतों के निराकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

90 दिन के भीतर करना होगा आवेदन

नियमों के अनुसार, कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा में पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए 90 दिन की अवधि तय की गई है। पंजीयन से पहले संबंधित क्षेत्र के स्थानीय निकाय निर्धारित मानकों के आधार पर संस्थान की व्यवस्था का परीक्षण करेंगे। पंजीयन हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी संस्थान की कई शाखाएं हैं, तो प्रत्येक शाखा को अलग कोचिंग केंद्र मानकर उसके लिए पंजीयन संबंधी शर्तों का पालन करना होगा।

नगर निगम और जनपद पंचायत के अधिकारियों को जिम्मेदारी

कोचिंग संस्थानों के पंजीयन के लिए क्षेत्रवार अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम क्षेत्र में संबंधित नगर निगम आयुक्त या उनके द्वारा नामित अधिकारी पंजीयन प्राधिकारी होंगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय निकायों की अधिसूचित सीमाओं को छोड़कर संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों के संचालन की निगरानी करना और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

वेबसाइट पर बतानी होगी पूरी फीस, शिक्षकों का ब्योरा भी जरूरी

नए नियमों के तहत कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसमें पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, फीस का पूरा विवरण, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शामिल होगी।

इससे विद्यार्थियों को दाखिला लेने से पहले संस्थान की सुविधाओं और फीस की तुलना करने में मदद मिलेगी। साथ ही, फीस या सुविधाओं को लेकर होने वाली संभावित गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जाएगा।

ट्यूटर बनने के लिए ग्रेजुएशन अनिवार्य

कोचिंग संस्थानों में ट्यूटर के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। इसके साथ ही, कर्मचारियों की नियुक्ति में निर्धारित पात्रता और प्रतिबंध संबंधी प्रावधानों का पालन करना होगा।

सरकार का उद्देश्य योग्य शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि कोचिंग की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

संवेदनशील जगहों को छोड़कर बाकी जगह CCTV लगेंगे 

विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसर में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। हालांकि, शौचालय, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं की जा सकेगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों की निजता भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है।

संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम भी करने होंगे। इसके अलावा, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों की उपलब्धता, आगंतुकों का रिकॉर्ड और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया है।

जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव पर रोक

नए नियमों में विद्यार्थियों के साथ भेदभाव नहीं करने पर भी जोर दिया गया है। प्रवेश और शिक्षण प्रक्रिया के दौरान धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या अन्य निर्धारित आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। इन आधारों पर अलग-अलग बैच बनाने पर भी रोक का प्रावधान है।

विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और शिक्षकों को उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील रखने पर भी जोर दिया गया है। शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों को अलग करने की व्यवस्था से बचने की बात भी नियमों में कही गई है।

परीक्षा के दबाव से निपटने के लिए काउंसलिंग जरूरी

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और परिणाम का मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर काउंसलिंग की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

संस्थानों को नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने, अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने और विद्यार्थियों की समस्याओं को समय पर समझने की व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्हें राज्य सरकार की मानसिक स्वास्थ्य नीति के अनुरूप काम करना होगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के तनाव से निपटने और करियर संबंधी सही निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

30 दिन में कर सकेंगे अपील

नियमों में कोचिंग संचालकों को अपील का अधिकार भी दिया गया है। यदि किसी संस्थान का पंजीयन या नवीनीकरण आवेदन अस्वीकार होता है अथवा उसका पंजीयन निलंबित या रद्द किया जाता है, तो संबंधित आदेश के खिलाफ अपील की जा सकेगी।

इसके लिए आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत करनी होगी। नियमों के अनुसार, सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निराकरण करने का प्रावधान है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह फायदा

नए नियमों से कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने का लक्ष्य है। इसके प्रमुख फायदे होंगे:

फीस में पारदर्शिता: दाखिले से पहले फीस और पाठ्यक्रम की पूरी जानकारी मिल सकेगी।

योग्य शिक्षक: ट्यूटर की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित होने से नियुक्ति प्रक्रिया में स्पष्टता आएगी।

बेहतर सुरक्षा: सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन इंतजामों पर जोर रहेगा।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता: विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन और करियर संबंधी मार्गदर्शन मिल सकेगा।

शिकायतों पर कार्रवाई: शिकायत निवारण की व्यवस्था से संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भेदभाव से सुरक्षा: विद्यार्थियों के साथ निर्धारित आधारों पर भेदभाव रोकने के प्रावधान लागू होंगे।

यह भी पढ़ें- नई फिल्म के नाम पर साइबर ठगी का नया खेल, 1 रुपये में 'मनोरंजन' के चक्कर में खाली हो रहे बैंक खाते

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के लिए जारी नए नियमों का उद्देश्य केवल पंजीयन की प्रक्रिया तय करना नहीं, बल्कि पढ़ाई के माहौल को सुरक्षित, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना भी है। अब इन प्रावधानों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पंजीयन, निरीक्षण और नियमों के पालन की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जाती है।