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नई फिल्म के नाम पर साइबर ठगी का नया खेल, 1 रुपये में 'मनोरंजन' के चक्कर में खाली हो रहे बैंक खाते

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:37 AM (IST)

साइबर ठग नई फिल्मों और वेब सीरीज को 1 रुपये में डाउनलोड करने का लालच देकर लोगों को फंसा रहे ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. साइबर ठग 1 रुपये में फिल्म डाउनलोड का लालच देते हैं।

  2. फर्जी वेबसाइटों से बैंकिंग जानकारी चुराकर खाते खाली कर रहे हैं।

  3. भोपाल में कई लोग इस '1 रुपये' के झांसे का शिकार हुए।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मनोरंजन का लालच और कीमत सिर्फ एक रुपए! साइबर ठग इसी आकर्षक ऑफर को हथियार बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर नई फिल्म या वेब सीरीज डाउनलोड करने के विज्ञापन दिखाए जाते हैं। कम कीमत देखकर लोग लिंक पर क्लिक कर देते हैं और यहीं से ठगी का खेल शुरू होता है।

फर्जी वेबसाइट पर एक रुपये का भुगतान करने के लिए कहा जाता है। इस दौरान ठग यूपीआई पिन या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करते हैं और फिर खाते से रकम उड़ा देते हैं। भोपाल में बीते कुछ दिनो से इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे है।

भोपाल में सामने आए मामले

एयरपोर्ट रोड स्थित गुलमोहर गार्डन निवासी शहजाद से इसी तरह 50 हज़ार रुपये की ठगी हुई थी। पिपलानी में रहने वाले संतोष सेन के साथ भी 1 रुपये में फिल्म डाउनलोड करने के नाम पर 39 हजार रुपये की ठगी हुई है। दोनों केस में पुलिस जांच कर रही है।

इस तरह बिछाते हैं ठगी का जाल

  • इंटरनेट मीडिया पर एक रुपये में फिल्म या वेब सीरीज डाउनलोड करने का विज्ञापन।
  • लिंक खोलने पर फर्जी वेबसाइट पर पहुंचाकर भुगतान करने को कहा जाता है।
  • भुगतान के दौरान यूपीआई पिन डालने या बैंकिंग जानकारी भरने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • कुछ मामलों में संदिग्ध एप डाउनलोड करवाकर मोबाइल की जानकारी चुराने की कोशिश भी हो सकती है।
  • गोपनीय जानकारी मिलने या भुगतान अधिकृत होने पर खाते से रकम निकाली जाती है।

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ऐसे बचें

- अनजान विज्ञापनों और संदिग्ध लिंक से फिल्म डाउनलोड न करें।
- फिल्म देखने के लिए आधिकारिक ओटीटी प्लेटफार्म का इस्तेमाल करें।
- किसी अनजान वेबसाइट पर यूपीआइ पिन, ओटीपी या बैंकिंग जानकारी न डालें।
- अनजान स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड न करें।

इंटरनेट मीडिया पर कम कीमत में फिल्म डाउनलोड करने के विज्ञापनों से सावधान रहें। किसी भी अनजान लिंक पर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या यूपीआइ पिन साझा न करें।
- शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच