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मध्य प्रदेश में भाजपा की नई रणनीति: निगम-मंडलों में बढ़ाएगी नारी शक्ति की हिस्सेदारी

Published: Tue, 21 Apr 2026 09:07 PM (IST)

लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित न होने के बाद, भाजपा मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों और प्रदेश कार्यसमिति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगी।

भाजपा ने बदली रणनीति (प्रतीकात्मक चित्र)

भाजपा ने बदली रणनीति (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, भोपाल। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के बाद भाजपा महिलाओं का समर्थन जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी के चलते मध्य प्रदेश में लंबे समय से रुकी हुईं राजनीतिक नियुक्तियों के मामले में अब नया मोड़ आ गया है।

नियुक्तियों में बढ़ेगी नारीशक्ति की हिस्सेदारी

फिलहाल भाजपा की रणनीति यह है कि निगम-मंडलों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाए। पार्टी राजनीतिक नियुक्तियों की सूची में अब नए सिरे से महिलाओं के नाम जोड़ेगी।

दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है कि भाजपा शासित राज्यों में प्रतीकात्मक रूप से या स्थानीय स्तर पर शासन-प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के नए कदम उठाए जाएं ताकि पार्टी की प्रतिबद्धता दिखाई दे। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में भी इस बार महिलाओं की संख्या बढ़ाएगी। बता दें, प्रदेश में महिला विधायकों की संख्या 27 है। यहां छह महिला सांसद हैं।

महिला वोट बैंक पर नजर

भाजपा ये प्रयास महिला मतदाताओं को बड़ा संदेश देने और जमीनी स्तर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने के लिए कर रही है। निगम-मंडलों में अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व देने के विचार के पीछे भी यही कारण है। लक्ष्य यह भी है कि इनमें महिला कार्यकर्ताओं को केवल सांकेतिक पद नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

भाजपा का मानना है कि महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान न हो पाने के लिए केवल विपक्ष जिम्मेदार है, वरना यह समाज के लिए गेम-चेंजर साबित होता।

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महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में प्रदेश आगे

  • मध्य प्रदेश में पंचायत राज संस्थाएं हों या नगर सरकार, सभी में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।
  • अच्छी बात यह भी है कि प्रदेश में लगभग 52.84 प्रतिशत महिलाएं पंचायत राज संस्थाओं में ग्रामीण सरकार का नेतृत्व कर रही हैं। इनमें पंच, सरपंच, जनपद पंचायत की सदस्य, अध्यक्ष और जिला पंचायत की अध्यक्ष व सदस्य शामिल हैं।
  • राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था में कुल 3,95,552 निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में से महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या 2,09,041 है। राज्य की 313 जनपद पंचायतों में से 179 में महिलाओं का नेतृत्व है, जो 57 प्रतिशत है।
  • 52 जिला पंचायतों में भी आधे में महिला जिलाध्यक्ष हैं। नगरीय निकायों में भी महिला नेतृत्व 50 प्रतिशत से अधिक है। प्रदेश के 16 नगर निगमों में से नौ में महिला महापौर हैं। इसी तरह कुल 7,321 पार्षदों में से 4,154 महिला पार्षद हैं।

भाजपा सदैव महिला सशक्तीकरण की पक्षधर रही है। देश की प्रथम नागरिक से लेकर वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री का दायित्व भी भाजपा ने महिलाओं का दिया है। भाजपा जो कहती है, वह करती है। पार्टी हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पक्षधर और प्रयासरत है।
-लता वानखेड़े, सांसद एवं सदस्य भाजपा कोर ग्रुप

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