मध्य प्रदेश में पदोन्नति के बाद अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए चलेगा अभियान, 16 हजार लंबित मामलों के निराकरण की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति के 16 हजार लंबित मामलों को तेजी ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
सरकारी कर्मचारियों के 16 हजार अनुकंपा नियुक्ति मामले लंबित।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
पदोन्नति के बाद खाली पदों से नियुक्ति की उम्मीद बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों पर अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के विभिन्न विभागों में करीब 16 हजार प्रकरण वर्षों से लंबित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को सभी विभागों को विशेष अभियान चलाकर इन मामलों का तेजी से निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री स्वयं भी जल्द ही इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे।
इन विभागों में ज्यादा मामले लंबित
अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों की संख्या लोक निर्माण, वन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, पुलिस एवं गृह, जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व और नगरीय विकास विभाग में अधिक है। स्कूल शिक्षा विभाग में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित थे। हालांकि, आयुक्त अभिषेक सिंह ने सभी संभागीय अधिकारियों को भोपाल बुलाकर दो दिन में शिक्षक और अन्य कर्मचारियों के 954 प्रकरणों का निराकरण कराया।
पदोन्नति के बाद खाली हुए पदों से बढ़ी उम्मीद
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अनुकंपा नियुक्ति के मामले लंबित रहने की एक बड़ी वजह पदोन्नति नहीं होना था। इससे विभिन्न संवर्गों में रिक्त पद उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। अब प्रदेश में एक लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति होने के बाद अलग-अलग संवर्गों में पद उपलब्ध होने की संभावना बढ़ी है। इसी को देखते हुए सरकार ने सभी विभागों को विशेष अभियान चलाकर पात्र आवेदकों के मामलों का निपटारा करने को कहा है।
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मुख्यमंत्री ने दिए थे संवेदनशीलता से निर्णय के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में पात्र आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के आदेश सौंपे थे। इसी दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरतते हुए अनावश्यक देरी न की जाए और सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए।