MP में खाली पड़ी सरकारी जमीन बेचने के बजाय उद्योगों को देगी सरकार, निवेशकों के लिए सुनहरा मौका
सरकार ने खाली पड़ी अनुपयोगी शासकीय जमीन को बेचने के बजाय उद्योगों को उपलब्ध कराने का बड़ा फैसला किया है। ...और पढ़ें

खाली पड़ी अनुपयोगी जमीन उद्योगों को देने की तैयारी (प्रतीकात्मक चित्र)

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राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्षों से खाली पड़ी अनुपयोगी शासकीय जमीन को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब ऐसी जमीनों को बेचने के बजाय निवेशकों को उद्योग स्थापित करने के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस दिशा में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ने काम तेज कर दिया है और प्रदेशभर में ऐसी भूमि चिन्हित की जा रही है, जहां बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) स्थापित हो सकें।
सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि कई जमीनें शहरों के भीतर या आसपास स्थित हैं, जहां बड़े उद्योग संभव नहीं हैं। ऐसे स्थानों पर लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिले।
198 एकड़ जमीन पर नए उद्योगों की तैयारी
प्रदेश में बंद पड़े तेल उत्पादन संयंत्रों की लगभग 198 एकड़ भूमि को नए उद्योगों के लिए उपयोग में लाने की योजना है। इनमें सीहोर के पचामा, नर्मदापुरम के बनापुरा, मुरैना के जड़ेरूआ और सीधी के चुरहट स्थित प्लांट शामिल हैं। इन जमीनों को एमएसएमई और एमपीआईडीसी के माध्यम से निवेशकों को देने की तैयारी चल रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार अब जमीन बेचने के बजाय पीपीपी मॉडल पर आईटी पार्क, डेटा सेंटर और हाईटेक टाउनशिप विकसित करने पर जोर देगी।
हाईवे किनारे बनेंगे इंडस्ट्रियल क्लस्टर
सरकार की योजना हाईवे से सटी प्राइम लोकेशन वाली जमीनों पर औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की भी है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के तहत फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। चिन्हित भूमि की जानकारी निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि निवेश आकर्षित किया जा सके।
5 साल में 101 संपत्तियां बेची जा चुकीं
गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने 1,110 करोड़ रुपये में 101 शासकीय संपत्तियों का विक्रय किया था। इनमें परिवहन निगम के बस डिपो, विभिन्न बोर्डों की जमीनें, सरकारी कार्यालय और जेल विभाग की संपत्तियां शामिल थीं।
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अब सरकार का फोकस इन परिसंपत्तियों को बेचने के बजाय उनका उपयोग कर औद्योगिक विकास को गति देने पर है, जिससे प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए जिलों से भूमि मांगी है। खाली पड़ी शासकीय भूमि उद्योग को देने के लिए कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है।
-दिलीप कुमार, आयुक्त, एमएसएमई।
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