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MP में UCC की सुगबुगाहट, उत्तराखंड के कानून का कराया जाएगा अध्ययन, इसी साल विधेयक ला सकती है सरकार

Published: Tue, 10 Feb 2026 10:40 PM (IST)

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार उत्तराखंड के UCC कानून ...और पढ़ें

समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी (प्रतीकात्मक चित्र)

समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार उत्तराखंड में लागू यूसीसी कानून का गहन अध्ययन कराने की तैयारी में है। यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं, तो 2026 के किसी विधानसभा सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार का रुख कानून को सीधे लागू करने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने का है। इन सुझावों पर विचार के बाद उन्हें विधेयक का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि व्यापक सहमति के साथ कानून को आगे बढ़ाया जा सके।

संघ प्रमुख के बयान से मिली नई गति

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एक सवाल के जवाब में यूसीसी को “अच्छा विचार” बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पक्षों को विश्वास में लेकर इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर चर्चाओं को नई धार मिली है।

पहले भी हो चुकी है पहल

मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर यह पहली कोशिश नहीं है। दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यूसीसी लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की थी। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव आ जाने के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

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उत्तराखंड मॉडल पर नजर

गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां 27 जनवरी 2025 से यूसीसी को पूरी तरह लागू किया जा चुका है। मध्य प्रदेश सरकार खासतौर पर वहां के विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों का अध्ययन कर रही है।

यूसीसी की विशेषताएं

  • महिलाओं की स्थिति में सुधार का हथियार : यूसीसी का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के अधिकारों पर पड़ने की उम्मीद है, वे किसी भी धर्म की हों। यदि यूसीसी कानून बना तो समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारा जा सकता है। लव-जिहाद और भूमि-जिहाद जैसे मामलों के बढ़ने के कारण हिंदू जागरण मंत्र भी मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बना रहा है।
  • पैतृक संपत्ति : लड़कियों को पिता की संपत्ति में लड़कों के बराबर कानूनी अधिकार मिलेगा। हालांकि, उत्तराखंड माडल में कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों को छूट दी गई है।
  • विवाह और तलाक : बहुविवाह पर पूर्ण रोक लगेगी और तलाक की प्रक्रिया सभी धर्मों की महिलाओं के लिए समान व न्यायपूर्ण होगी।
  • भरण-पोषण : तलाक के बाद महिलाओं को मिलने वाले गुजारे भत्ते के नियम स्पष्ट और एक समान होंगे।
  • अनिवार्य पंजीकरण : लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना होगा।
  • सुरक्षा : इससे लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को कानूनी मान्यता और संपत्ति में अधिकार मिलेगा।
  • जनजातीय समुदायों को छूट : उत्तराखंड के यूसीसी माडल में जनजातीय समुदायों को बाहर रखा गया है। मध्य प्रदेश में भी बड़ी आदिवासी जनसंख्या को देखते हुए संभव है कि उनके पारंपरिक रीति-रिवाज, विवाह की विशिष्ट पद्धतियों को इस कानून से छूट दी जाए।


समान नागरिक संहिता के बारे में भाजपा लगातार संकल्पबद्ध रही है, इसलिए लोकसभा चुनाव में भी इस संकल्प को दोहराया गया है। संविधान के दायरे में विधि सम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए उचित समय पर उचित निर्णय किया जाएगा।
-रजनीश अग्रवाल, प्रदेश मंत्री, भाजपा मध्य प्रदेश

हम तो समान नागरिक संहिता को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं। हमारा स्लोगन ही 'सुदृढृ देश का आधार- समान नागरिक संहिता पर करो विचार' है। जब मंत्री थी तो भी सरकार से यूसीसी पर विचार के बाद कमेटी का गठन करवाया था। हम चाहते हैं कि यूसीसी पर काम तेज हो।
-ऊषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक महू-भाजपा