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MP: शाख्यासागर तालाब के दूषित पानी से माधव टाइगर रिजर्व के बाघों और जलीय जीवों पर मंडराया खतरा

Published: Sun, 08 Mar 2026 07:44 AM (IST)

शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में शाख्यासागर तालाब का बढ़ता प्रदूषण बाघों और जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बन ...और पढ़ें

तालाब में फैली जलकुंभी (प्रतीकात्मक चित्र)

तालाब में फैली जलकुंभी (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, भोपाल। शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर पर्यावरणीय संकट गहराता नजर आ रहा है। रिजर्व के प्रमुख जलस्रोत शाख्यासागर तालाब (चांदपाठा) में बढ़ते प्रदूषण ने बाघों समेत अन्य वन्य और जलीय जीवों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।

पूर्व वन बल प्रमुख वीएन अंबाडे ने अपने कार्यकाल के दौरान तालाब के दूषित पानी को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए जिम्मेदार विभागों को पत्र लिखकर शीघ्र शुद्धिकरण के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि तालाब में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और जल को स्वच्छ बनाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है।

बिना उपचार के छोड़ा जा रहा सीवेज

पत्र में उल्लेख किया गया था कि पिछले कुछ वर्षों से शिवपुरी शहर का सीवेज बिना उपचार के सीधे शाख्यासागर तालाब में छोड़ा जा रहा है। इसके चलते तालाब में जलकुंभी तेजी से फैल रही है, जिससे पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है और जलीय जीव-जंतुओं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

निरीक्षण में सामने आई गंभीर स्थिति

जुलाई 2024 में किए गए निरीक्षण के दौरान इस समस्या को बेहद गंभीर पाया गया था। उस समय नगर पालिका शिवपुरी से संपर्क कर प्रदूषण रोकने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बाद 29 अगस्त 2024 को आयोजित बैठक में भी इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं। अंबाड़े विगत 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो गए हैं लेकिन अब भी माधव टाइगर रिजर्व के तहत आने वाले शाख्यासागर तालाब में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है।

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रामसर साइट होने से और बढ़ी जिम्मेदारी

महत्वपूर्ण बात यह है कि शाख्यासागर तालाब को वर्ष 2021 में रामसर साइट का दर्जा मिला है, जिससे इसका संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह तालाब माधव टाइगर रिजर्व के बाघों के अलावा मगरमच्छ, मछलियों और कई अन्य जलीय जीवों के लिए प्रमुख जलस्रोत है।

ऐसे में पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तालाब के प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।