खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की प्राचीन खंडित मूर्ति को फिर मिलेगा पूर्ण स्वरूप, ASI ने शुरू की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जवारी मंदिर में 11वीं सदी की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का सिर दोबारा जोड़ा ...और पढ़ें

जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति। (सौजन्य- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
खजुराहो के जवारी मंदिर में विष्णु प्रतिमा का सिर जुड़ेगा।
ASI ने 11वीं सदी की खंडित मूर्ति की बहाली शुरू की।
विशेषज्ञों की टीम पहले प्रतिमा की तकनीकी जांच करेगी।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित विश्व प्रसिद्ध मंदिरों में अब एक ऐतिहासिक धरोहर अपने पुराने स्वरूप में लौटने की राह पर है। जवारी मंदिर में स्थापित 11वीं सदी की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का सिर दोबारा जोड़ा जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस दिशा में बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल खजुराहो स्मारक समूह के इस मंदिर में भगवान विष्णु की करीब सात फीट ऊंची बलुआ पत्थर की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का धड़, चारों भुजाएं और पैर सुरक्षित हैं, लेकिन लंबे समय से इसका मस्तक गायब है। अब एएसआई विशेषज्ञों की मदद से इसे मूल स्वरूप देने की तैयारी में जुट गया है।
विशेषज्ञों की टीम करेगी मूर्ति की जांच
एएसआई की पीआरओ एवं संयुक्त महानिदेशक डॉ. नंदिनी भट्टाचार्य ने बहाली की प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा को जोड़ने का काम जल्दबाजी में नहीं किया जाएगा। पहले इसकी विस्तृत तकनीकी जांच और आवश्यक परीक्षण किए जाएंगे।
इसके लिए एएसआई महानिदेशक के स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम मौके पर पहुंचकर प्रतिमा की स्थिति, पत्थर की संरचना और मस्तक को दोबारा जोड़ने की तकनीकी संभावनाओं का अध्ययन करेगी। जांच के बाद ही बहाली की अगली प्रक्रिया तय होगी।
दिख सकता है प्रतिमा का पूरा स्वरूप
एएसआई के इस कदम से उम्मीद जगी है कि जवारी मंदिर की यह प्राचीन प्रतिमा आने वाले समय में अपने मूल स्वरूप में नजर आ सकेगी। हालांकि, पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण से जुड़े इस काम में समय लगने की संभावना है। विशेषज्ञों की जांच और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मूर्ति का सिर जोड़ा जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
भगवान विष्णु की यह ऐतिहासिक प्रतिमा करीब एक साल पहले सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा का विषय बनी थी। प्रतिमा के संरक्षण और उसके मूल स्वरूप से जुड़े विवाद के बीच अब एएसआई की ओर से बहाली की प्रक्रिया शुरू किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चंदेलकालीन कला और स्थापत्य की पहचान माने जाने वाले खजुराहो के लिए यह पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां मौजूद प्रत्येक प्रतिमा और मंदिर भारतीय कला इतिहास की अनमोल विरासत है। जवारी मंदिर की भगवान विष्णु प्रतिमा को सिर मिलने के बाद इसकी ऐतिहासिक और कलात्मक प्रस्तुति और अधिक पूर्ण हो सकेगी।
