कारम बांध हादसा : 350 पेज की जांच रिपोर्ट सौंपी; सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी
धार जिले के कारम बांध फूटने के मामले में साढ़े तीन साल बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी ...और पढ़ें

304.44 करोड़ की लागत से बना बांध टूट गया था।

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राज्य ब्यूरो, भोपाल। धार जिले के ग्राम कोठीदा में कारम सिंचाई परियोजना के तहत बने कारम बांध के फूटने के मामले में साढ़े तीन साल बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। 350 पन्नों की इस रिपोर्ट में मुख्य अभियंता (सीई) और अधीक्षण यंत्री सहित कुल पांच इंजीनियरों को दोषी ठहराया गया है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा इन आरोपित अधिकारियों के खिलाफ 17 फरवरी को सुनवाई की जाएगी।
जांच में तीन इंजीनियरों को साक्ष्यों के अभाव में क्लीनचिट दी गई है। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली की एएनएस कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा 304.44 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कारम बांध अगस्त 2022 में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आया था।
इन इंजीनियरों पर लगे आरोप साबित
रिपोर्ट के अनुसार प्रभारी मुख्य अभियंता नर्मदा-ताप्ती कछार सीएस घटोल, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मंडल धार पी. जोशी, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री बीएल निनामा, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी विकार अहमद सिद्दीकी और तत्कालीन उपयंत्री विजय कुमार जत्थाप के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।
वहीं तत्कालीन उपयंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार राम और दशवंता सिसोदिया पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते इन्हें जांच से मुक्त कर दिया गया है।
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अतिवृष्टि नहीं, लापरवाही मानी गई कारण
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान निर्माणाधीन मध्यम श्रेणी के बांध का क्षतिग्रस्त होना कोई सामान्य घटना नहीं है और इसे केवल अतिवृष्टि जनित प्राकृतिक आपदा मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनहानि न होने का तर्क दोषी इंजीनियरों के कदाचरण को कम नहीं करता।
शासन को लगी आर्थिक चपत
रिपोर्ट में कलेक्टर धार के 3 फरवरी 2026 के पत्र का हवाला देते हुए बताया गया है कि कारम बांध दुर्घटना के बाद प्रभावित किसानों और अन्य लोगों को कुल 14 लाख 70 हजार 398 रुपये का मुआवजा दिया गया। इसमें खेती की जमीन पर मिट्टी जमने के लिए 1 लाख 94 हजार 419 रुपये, फसल क्षति के लिए 9 लाख 90 हजार 679 रुपये, ईंट भट्टों के नुकसान पर 2 लाख 30 हजार रुपये और मकानों के नुकसान पर 1 लाख 15 हजार 300 रुपये शामिल हैं। इस तरह हादसे के कारण शासन को उल्लेखनीय वित्तीय हानि उठानी पड़ी।
