इबोला से बर्ड फ्लू तक...अब एक नेटवर्क में बंधेगा हाई-रिस्क रिसर्च; भोपाल के निहसाद में तैयारी शुरू
भोपाल स्थित निहसाद ने देशभर की उच्च जोखिम वाली रोगजनक प्रयोगशालाओं को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय नेटवर्क पहल की ...और पढ़ें

रिसर्च लैब (प्रतीकात्मक चित्र)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (निहसाद) ने देशभर की उच्च जोखिम वाली रोगजनक प्रयोगशालाओं को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने की दिशा में अहम पहल शुरू की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बीएसएल-3 और बीएसएल-4 श्रेणी की सबसे सुरक्षित प्रयोगशालाओं के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना है, ताकि किसी संभावित वायरस अटैक या महामारी की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
देश की सबसे सुरक्षित लैब्स एक मंच पर
फिलहाल भारत में केवल दो कार्यात्मक बीएसएल-4 (बायो सेफ्टी लेवल-4) प्रयोगशालाएं हैं। इनमें एक भोपाल स्थित निहसाद में और दूसरी पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) में संचालित हो रही है। इन प्रयोगशालाओं में इबोला, कांगो फीवर और बर्ड फ्लू जैसे अत्यंत खतरनाक वायरस पर शोध किया जाता है, जो बेहद कम समय में महामारी का रूप ले सकते हैं।
इसके अलावा देश में 30 से 40 बीएसएल-3 प्रयोगशालाएं भी हैं, जो एम्स, आईसीएमआर और विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत हैं। प्रस्तावित नेटवर्क के माध्यम से इन सभी उच्च सुरक्षा प्रयोगशालाओं को एक साझा प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा।
‘वन हेल्थ’ लक्ष्य की ओर बड़ा कदम
इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य सभी प्रयोगशालाओं के शोध और निगरानी डेटा को एकीकृत कर ‘वन हेल्थ’ अवधारणा को सशक्त करना है, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ देखा जाता है। इससे रोगों की समय रहते पहचान और नियंत्रण में मदद मिलेगी।
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रियल टाइम डेटा से मिलेगी बढ़त
नेटवर्क के सक्रिय होने के बाद खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया से जुड़े शोध और निगरानी आंकड़ों का रियल टाइम आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर डेटा साझा करने में देरी ही महामारी के फैलने का कारण बनती है। ऐसे में यह पहल देश की जैव-सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
इस परियोजना के माध्यम से हम विभागों में मौजूदा और आगामी उच्च जोखिम वाली प्रयोगशालाओं का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। इस इंटरकनेक्टिविटी से देश की जैविक सुरक्षा पुख्ता होगी और शोध कार्यों में तेजी आएगी। यह तंत्र भविष्य की चुनौतियों के लिए हमें तकनीकी रूप से तैयार रखेगा।
- डा. अश्विन अशोक राउत, प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर, निहसाद, भोपाल
