भोपाल पुलिस में घमासान : एसआई ने एसपी पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए, कहा- शिकायत को ही मानें सुसाइड नोट
भोपाल में सूखीसेवनिया थाने के सब-इंस्पेक्टर कैलाश चंद्र यादव ने भोपाल देहात के एसपी रामशरण प्रजापति पर मानसिक प्रताड़ना और ...और पढ़ें

एसआई ने लगाए गंभीर आरोप (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस विभाग के भीतर एक गंभीर और संवेदनशील विवाद सामने आया है। सूखीसेवनिया थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर (एसआई) कैलाश चंद्र यादव ने भोपाल देहात के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रामशरण प्रजापति पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। एसआई ने वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राहत नहीं मिली, तो वे आत्मघाती कदम उठा सकते हैं।
गाली-गलौज और अपमान का आरोप
एसआई कैलाश चंद्र यादव ने भोपाल देहात के आईजी को सौंपे शिकायती आवेदन में बताया कि एसपी रामशरण प्रजापति ने उन्हें पुराने मामलों की समीक्षा के बहाने अपने कार्यालय बुलाया था। आरोप है कि चर्चा के दौरान एसपी ने उनके साथ अभद्र भाषा में बात की और गाली-गलौज की। जब एसआई ने इसका विरोध किया तो उन्हें धक्के देकर कार्यालय से बाहर निकालने की धमकी दी गई। इस घटना से आहत होकर एसआई ने थाने लौटकर पूरे घटनाक्रम की रोजनामचा में प्रविष्टि कर दी।
रोजनामचा एंट्री के बाद बढ़ा विवाद
शिकायत में कहा गया है कि रोजनामचा में घटना दर्ज किए जाने की जानकारी मिलते ही एसपी और अधिक नाराज हो गए। एसआई यादव का आरोप है कि इसके बाद उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण भावना से दो अलग-अलग विभागीय जांच (डीई) शुरू करवाई गईं। उनका कहना है कि पिछले चार महीनों से लगातार दबाव और प्रताड़ना के कारण विभाग में काम करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र, भावुक अपील
एसआई यादव ने अपनी पीड़ा आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाई है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनके पास अब केवल दो विकल्प बचे हैं& या तो वे न्याय की गुहार लगाएं या फिर आत्महत्या कर लें। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो इस शिकायत को ही उनका ‘सुसाइड नोट’ माना जाए।
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एसपी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, इन आरोपों पर भोपाल देहात एसपी रामशरण प्रजापति ने सफाई देते हुए इन्हें निराधार करार दिया है। एसपी के अनुसार, 22 सितंबर 2025 को एसआई केसी यादव के खिलाफ एक आपराधिक प्रकरण में गंभीर त्रुटियां सामने आने पर प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए थे। यह जांच एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा की गई, जिसकी रिपोर्ट 23 जनवरी 2026 को प्राप्त हुई।
एसपी का कहना है कि जांच में दोष सिद्ध होने की संभावना के चलते एसआई दबाव बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।
