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रेल यात्रियों के लिए राहतभरी खबर : 6 'स्पेशल' ट्रेनें बनेंगी नियमित, किराया भी कम होगा

Published: Sun, 19 Apr 2026 05:07 PM (IST)

पश्चिम मध्य रेलवे ने 6 'स्पेशल' ट्रेनों को नियमित एक्सप्रेस में बदलने का प्रस्ताव भेजा है, जिससे यात्रियों को 10-150 रुपये तक की किराये में राहत मिलेगी।

छह स्पेशल ट्रेनों को नियमित का दर्जा देने की तैयारी (प्रतीकात्मक चित्र)

छह स्पेशल ट्रेनों को नियमित का दर्जा देने की तैयारी (प्रतीकात्मक चित्र)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) जोन ने लंबे समय से ‘स्पेशल’ श्रेणी में संचालित हो रही 6 प्रमुख ट्रेनों को नियमित एक्सप्रेस में बदलने का प्रस्ताव भेजा है। यदि यह प्रस्ताव जुलाई तक मंजूर हो जाता है, तो इन ट्रेनों में लगने वाला अतिरिक्त शुल्क खत्म हो जाएगा, जिससे यात्रियों को टिकट कीमतों में 10 से 150 रुपये तक की सीधी राहत मिलेगी।

इन यात्रियों को विशेष फायदा

इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को होगा, जो नियमित रूप से इन ट्रेनों में सफर करते हैं। खास बात यह है कि सूची में भोपाल होकर गुजरने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें—आरकेएमपी-अगरतला और जबलपुर-बांद्रा—जबलपुर भी शामिल हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल ट्रेनों का संचालन अक्सर अस्थायी और समय में बदलाव वाला होता है, लेकिन नियमित एक्सप्रेस बनने के बाद इनकी टाइमिंग अधिक स्थिर और संचालन बेहतर हो सकेगा। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे का लक्ष्य धीरे-धीरे अधिक से अधिक स्पेशल ट्रेनों को स्थायी श्रेणी में शामिल करना है।

इन ट्रेनों को मिलेगा नियमित दर्जा

आरकेएमपी–अगरतला–आरकेएमपी (01665-01666)
जबलपुर–पुणे–जबलपुर (02131-02132)
जबलपुर–कोयंबटूर–जबलपुर (02197-02198)
रीवा–सीएसएमटी–रीवा (02187-02188)
जबलपुर–हावड़ा–जबलपुर (01701-01702)
जबलपुर–बांद्रा–जबलपुर (02133-02134)

बीना-भोपाल-इटारसी रूट पर भारी दबाव

वहीं, बीना-भोपाल-इटारसी रेलखंड पर बढ़ते ट्रैफिक ने रेलवे के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। करीब 280 किलोमीटर लंबे इस रूट पर फिलहाल 150% क्षमता से संचालन हो रहा है। यहां से रोजाना लगभग 260 यात्री ट्रेनें और 150 मालगाड़ियां गुजरती हैं, जिसके चलते देरी और सिग्नल संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं।

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इस समस्या के समाधान के लिए रेलवे ने चौथी लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण में करीब तीन साल का समय लगने की संभावना है। ऐसे में आने वाले समय में भी इस व्यस्त रूट पर दबाव बने रहने के संकेत हैं।

रेलवे का यह कदम जहां यात्रियों को सस्ती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प देगा, वहीं संचालन को भी अधिक व्यवस्थित बनाने में मददगार साबित हो सकता है।