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छोटा ही नहीं, सुंदर और बेहतर रास्ता भी बताएगा IISER का नया एप

By Anjali RaiEdited By: Sakshi Gupta
Published: Mon, 06 Apr 2026 04:55 PM (GMT+05:30)

वर्तमान नेविगेशन ऐप अक्सर खतरनाक रास्ते दिखाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए आइसर भोपाल ने एक नया मोबाइल ऐप विकसित किया है।

IISER का नया एप (जागरण)

IISER का नया एप (जागरण)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें
अंजली राय, भोपाल। मोबाइल आधारित वर्तमान नेविगेशन सिस्टम, जैसे गूगल मैप मुख्य रूप से कम समय और कम दूरी वाले रास्तों को प्राथमिकता देता है, लेकिन कई बार ये वाहन चालकों को ऐसे क्षेत्रों से ले जाता है, जो तंग या खतरनाक हो सकते हैं।
 
इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल के विज्ञानियों ने एक ऐसा मोबाइल एप विकसित किया है, जो छोटा ही नहीं बल्कि सुंदर और बेहतर रास्ता भी बताएगा।
 
डाटा साइंस विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. वैभव कुमार उपाध्याय को इस तरह के एप का विचार तब आया, जब केरलम की पेरियार नदी में डूबकर दो डाक्टरों के मरने की खबर आई। वे लोग रात में लौटते समय गूगल मैप के भरोसे कार चला रहे थे और मैप उन्हें बाढ़ वाली नदी में ले गया।
 
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वैभव बताते हैं कि विदेश में कुछ एप रास्ते के साथ, वहां मौजूद पार्कों, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक इमारतों की जानकारी भी देते हैं। ऐसे में ऐसा एप बनाने का विचार आया, जिसमें उक्त सभी खूबियां हों।
दो शोधार्थियों प्यारे लाल व तनिष्क कुमार बसवाल के साथ मिलकर दो साल में एप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित माडल पर तैयार कर लिया।
 
यह एप रूट प्लानिंग को केवल दूरी और समय तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसमें सुरक्षा, दर्शनीयता, हरियाली, प्रदूषण स्तर और यातायात घनत्व जैसे महत्वपूर्ण मानकों को भी शामिल करता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल अप्लाइड अर्थ इन जियो इंफार्मेटिक्स में प्रकाशित हुआ है।
 
तकनीक अब पेटेंट की प्रक्रिया में है। पेटेंट मिलने के बाद अगर कोई टेक्नोलाजी कंपनी इस एप को लेती है, तो वह इसे बाजार में उतारेगी। अगर नहीं तो आइसर का स्टार्टअप ही इसे बाजार में उतारेगा।

रास्ते को मिलीमीटर की सटीकता से मापता है

डॉ. वैभव कुमार उपाध्याय का कहना है इस मॉडल में लिडार और थ्रीडी डाटा को शामिल किया जा रहा है। तस्वीरें केवल यह बताती हैं कि रास्ता कैसा दिखता है, लेकिन लिडार डाटा रास्ते की चौड़ाई और उसकी सतह की बनावट को मिलीमीटर की सटीकता से मापता है। इससे उन हिस्सों की पहचान करना आसान होगा, जहां बुनियादी ढांचे में सुधार की अधिक जरूरत है।
 
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मशीन को सिखाया मानवीय नजरिये से समझना

इस शोध में इमोशनल डाटा बेस के जरिये एआइ को शहरों को मानवीय दृष्टि से समझना सिखाने के लिए टीम ने हजारों 360 डिग्री स्ट्रीट-व्यू तस्वीरों का उपयोग किया है।
 
डाटा की सटीकता सुनिश्चित करने और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के प्रभाव को कम करने के लिए विज्ञानियों ने प्रत्येक फोटो पर तीन से पांच लोगों की राय जानी।

सड़क का ऐसा वर्गीकरण

सुरक्षा: सड़क पर पर्याप्त रोशनी और दृश्यता।
सुंदरता: हरियाली और वास्तुकला की उपस्थिति।
जीवंतता: व्यावसायिक गतिविधियां और लोगों की मौजूदगी।
उबाऊ: सुनसान या नीरस रास्ता।

इनके लिए यह उपयोगी होगा

पैदल यात्री: पैदल चलने के प्रति रुचि बढ़ेगी, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
वाहन चालक: अब तनावपूर्ण ट्रैफिक के बजाय सुरक्षित और बेहतर दृश्य वाले मार्गों का विकल्प चुन सकेंगे।
शहरी नियोजन: प्लानरों के लिए एक टूल की तरह कार्य करेगा, जिससे वे समझ सकेंगे कि शहर के किन क्षेत्रों में सुरक्षा और सुंदरीकरण की जरूरत है।
 
यह नया एप गूगल मैप का विकल्प हो सकता है। अभी हमारे पास गूगल जैसा ट्रेवल डाटा नहीं है और गूगल के पास हमारे जैसा वैकल्पिक एल्गोरिदम नहीं है। पेटेंट के बाद इसकी इस संभावना को भी विकसित कर लिया जाएगा।